महाराष्ट्र में सीबीआई को बिना इजाजत नो एंट्री


मुंबई

टीवी चैनलों का टीआरपी घोटाला मामले में राज्य सरकार द्वारा सीबीआई को जांच के लिए दी गई सामान्य सहमति को बुधवार को सरकार ने वापस ले लिया है। इस कारण अब सरकार कीइजाजत के बिना सीबीआई महाराष्ट्र में टीआरपी घोटाले की जांच नहीं कर सकेगी। मिली जानकारी के अनुसार अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद केंद्र सरकार ने सीबीआई की जांच का आदेश दिया था। सीबीआई जांच के आदेश के बाद राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार की राज्य सहित पूरे देश में किरकिरी हुई थी, जिसके बाद अब टीआरपी फ्राड मामले में सीबीआई जांच की मांग हो सकती है, इसलिए बुधवार को आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सरकार की तर्ज पर राज्य की महाविकास आघाड़ी सरकार ने निर्णय लिया है कि बिना सरकार के इजाजत के सीबीआई किसी भी मामले में जांच नहीं करेगी। बतादें कि टीआरपी फ्राड मामले में सीबीआई ने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने के आधार पर बीते मंगलवार को एफआईआर दर्ज की थी। एक विज्ञापन कंपनी के प्रमोटर की शिकायत पर लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज करवाया गया था, जिसे बाद में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा सीबीआई को सौंप दी गई थी। यह मामला टीआरपी में हेरफेर से संबंधित है। टीआरपी का यह कथित घोटाला तब सामने आया था, जब रेटिंग एजेंसी ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया था कि कुछ चैनल विज्ञापनदाताओं को लुभाने के लिए टीआरपी नंबरों में धांधली कर रहे हैं। जिसे लेकर मुंबई के पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह ने प्रेस वार्ता कर रिपब्लिक टीवी और दो अन्य पर टीआरपी में हेरफेर करने का आरोप लगाया था। मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने मंगलवार को दो और लोगों को टीआरपी मामले में गिरफ्तार किया था, जिसको मिलाकर पूरे मामले में अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। टीआरपी फ्राड का बढ़ता मामला देख राज्य सरकार को संकेत मिल गया है कि अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मामले की तरह टीआरपी फ्राड मामले में सीबीआई जांच की मांग हो सकती है, इसलिए सकरार ने निर्णय लिया है कि सरकार के बिना इजाजत के सीबीआई राज्य में किसी भी मामले की जांच नहीं करेगी। बता दें कि अब महाराष्ट्र देश का तीसरा राज्य होगा, जहां बिना सरकार के इजाजत के सीबीआई जांच नहीं करेगी इससे पहले आंध्र प्रदेश के बाद पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने राज्य में छापे मारने और जांच के लिए सीबीआई को दी गई सामान्य सहमति को वापस ले लिया


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