घटनाओं की गहन छानबीन जरूरी

अभी हाथरस और बलरामपुर की बलात्कार और हत्या की आग ठंडी ही नहीं हुई कि गोंडा में सोती हुई तीन लड़कियों पर एसिड फेंकने का एक जघन्य और हृदयविदारक कुकृत्य सामने आया है. जिसमे एक लड़की गंभीर रूप से घायल हुई है, जिससे पूरा परिवार हतप्रभ है. उन्हें नहीं पता कि किसने किस कारण से ऐसी खूंख्वार करतूत को अंजाम दिया है, प्रशासन ने अपनी धर-पकड़ शुरू कर दी है. निस्संदेह अपराधी जल्द गिरफ्तार होंगे, लेकिन जिस तरह अचानक इस प्रकार के मामलों की रिपोर्ट राज्य के कोने-कोने से आ रही है, इन मामलों को इस तरह भी देखने की जरूरत है कि कहीं कोई षडयंत्र तो नही हो रहा है? महिलाओं के प्रति होने वाले इन अपराधों में एक तरह का पैटर्न दिख रहा है, ज्यादातर मामलों में उनका अनुसूचित समुदाय से जुड़ा होना इसमें षडयंत्र की आशंका को और मज़बूती प्रदान कर रहा है. इसलिए इन घटनाक्रमों को सिर्फ कानून व्यवस्था की समस्या ही मानना समुचित नही होगा. कानून अपना काम कर रहा है, वह करे. लेकिन उसके साथ उनकी इस कोंण से भी जांच जरूरी है कि कहीं उत्तरप्रदेश सरकार को बदनाम करने की कोई परोक्ष या प्रत्यक्ष अभियान तो असमाजिक तत्व और राजनीतिक विरोधी नहीं चला रहे है. जैसा कि कुछ दिनों पहले हाथरस काण्ड के बाद सुख़िर्यों में आया था, कि उत्तर प्रदेश सरकार को बदनाम करने के लिए मध्य एशिया और पाकिस्तान से असामाजिक तत्वों को मदद पहुंचाई जा रही है. साथ ही पीएफआई जैसे संगठन का नाम भी उछला था. उत्तरप्रदेश राजनीतिक दृष्टि से देश का सबसे जागरूक और, महतवपूर्ण सूबा है जिस पर हर राजनैतिक पार्टी की नजर रहती है, सब वहां अपनी पकड़ बनाना चाहते है. सबकी स्थिति आज उत्तरप्रदेश में सोचनीय है. इसका कारण है भाजपा नीत योगी सरकार के काम, उनकी असामाजिक तत्वों की कमर तोड़ने वाली कारवाई से राज्य में त्राहि- त्राहि मची हुई है, जिसका सूबे का जनमानस स्वागत और सराहना कर रहा है. साथ ही अपराधियों, गुंडों, दादाओं के पर कतरने की जो मुहिम चल रही है, राज्य में जो विकास कार्य हो रहे है, यह सब जिस तरह प्रदेश की छवि बदल रहे है, आज जिस तरह देश और दुनिया में राज्य की नयी धमक बन रही है, उसके चलते जाति-धर्म और अपराध के संगम से सत्ता सुन्दरी का उपभोग करने वाले नेता और अपराधी सब विचलित और बेहाल है. स्वाभाविक है कि वे सब मिलकर योगी का खेल बिगाड़ना चाहेंगे और किसी भी तरह से राज्य सरकार को बदनाम करने से नहीं चूकेंगे. 

इसलिये अब उत्तर प्रदेश सरकार को इन मामलों की दो तरह से छानबीन करनी होगी. पहला राज्य में हर परिस्थिति में कानून का राज्य कायम हो, और किसी भी तरह की असमाजिक गतिविधियों में लिप्त लोगों के खिलाफ सख्त कारवाई हो. उनके समूल उन्मूलन का जो अभियान राज्य में जारी है वह तब तक तेज गति से जारी रहे, जब तक इनका पूरा सफाया नहीं हो जाता. जिस तरह लोग हैरतंगेज तरीके से खौफनाक अपराधों को अंजाम दे रहे है, उसका रुकना और कानून की धाक होना जरूरी है. साथ ही इन मामलों की इस तरह भी गहन जांच जरूरी है कि, कहीं ऐसी भयंकर वारदातें जान-बूझकर राज्य की सरकार और उसके मुखिया की छवि खराब करने के लिए तो नही अंजाम दी जा रही है? कारण जिस तरह चीजें हो रही है और जिस तरह महिलाओं और लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है, यदि ऐसी वारदातों पर लगाम नहीं लगी तो यह सारी घटनाएं अच्छे कामों को बेकार करते हुए सरकार की स्थिति को चुनौती पूर्ण बना सकती है. 

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