कमलनाथ के आपत्तिजनक बोल

कमलनाथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता है, वे केन्द्रीय मंत्री से लेकर मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री तक का पद सुशोभित कर चुके है. यही नहीं पार्टी संगठन में भी बड़ी और महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके है, और अभी भी निभा रहे है. उनका ऐसे नेता पर जो अभी हाल तक उन्हीं की पार्टी में उनकी सहयोगी रह चुकी है और आज भाजपा की ओर से चुनाव लड़ रही, राज्य के वरिष्ठ नेत्री हैं, उनको आइटम कहना जितना निंदनीय है, उतना ही आपत्तिजनक भी है. बड़े पदों पर बैठे लोगों को ऐसा आचरण करना चाहिए कि उनके अनुगामी उनसे सीखें, उन्हें भावी पीढ़ी के कार्यकर्ताओं के लिए उदाहरण बनना चाहिये, न कि ऐसा वक्तव्य देना चाहिए कि उनकी चारो ओर थू-थू हो. वह प्रदेश में एक पार्टी का चेहरा है, यदि वे ऐसा करेगे तो दूसरे क्या करेंगे? इसलिए उन्हें अपने ऐसे लज्जास्पद और असभ्य व्यवहार के लिए इमरती देवी से क्षमा मांगनी चाहिए. इन्ही सब कारणों से महिलायें जल्दी राजनीति में आना नहीं चाहती. यदि बड़े-बड़े नेता ऐसा बयान देंगे तो माहौल और खराब होगा. ऐसे बयानों की जितनी भी भर्त्सना की जाय कम है, वैसे भी कांग्रेस के नेता पार्टी का चाहे जितना नुकसान हो अपनी बयान बहादुरी से बाज नहीं आ रहे हैं. अभी चिदंबरम द्वारा कश्मीरी अलगाववादियों के साथ सुर में सुर मिलाने की आग ठंडी भी नहीं हुई थी कि थरूर पाकिस्तान में जाकर कुछ उल्टा-सीधा बोल जाते है, और राहुल गांधी तो क्या बोल जाते है खुद ही जाने. इन नेताओं को यह पता नहीं की पार्टी की आज देश में जो हालत है, वह बयान बहादुरी से नहीं सुधरने वाली, उल्टा वह पहले से खराब हालत को और भी खराब करती है. इन नेताओं को ऐसे बयान देकर पार्टी की रही-सही साख पर और भी बट्टा लगाने का काम बंद करना चाहिए. इन्हें अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल पार्टी को नवजीवन देने के लिए लगाना चाहिए और सकारात्मक विरोध का रास्ता अख्तियार करना चाहिए. लोगों के हास्य और आक्रोश का पात्र बनाने वाले विधान कब तक करते रहेंगे? उससे सिर्फ और सिर्फ नुकसान ही होना है, जिसका आभास भी इन बयान बहादुरों को नही हो रहा है.

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