आक्रामकता दिखाकर अब 'स्वीट डील' करना चाहता है चीन

 


नई दिल्ली
 

अप्रैल महीने में भारत और चीन के बीच शुरू हुआ सीमा विवाद अब भी जारी है। दोनों तरफ के राजनयिकों से लेकर सैन्य कमांडरों और विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हो चुकी है। कुछ ही दिन पहले सैन्य कमांडर स्तर लेवल की सातवें दौर की वार्ता खत्म हुई। दोनों देशों ने माना कि हम बातचीत के जरिए मसला सुलझाने को प्रतिबद्ध हैं। अब दोनों देशों में 8वें दौर की वार्ता का इंतजार किया जा रहा है। माना जा रहा है कि ये नवंबर के पहले सप्ताह में हो सकती है। लेकिन इतनी लंबी बातचीत के बाद भी मसला सुलझता क्यों नहीं दिख रहा है? 

कई दौर की हो चुकी है वार्ता 

दरअसल, अप्रैल-मई महीने में जब चीन की तरफ से लद्दाख बॉर्डर पर अतिक्रमण की घटना हुई तो भारत ने विरोध दर्ज कराया। लेकिन जून महीने के मध्य में गलवान घाटी की घटना में अपने 20 सैनिकों की शहादत के बाद भारत ने इस विवाद को लेकर बेहद सख्त रुख अख्तियार किया। 

रिपोर्ट के मुताबिक हर बातचीत में भारत की तरफ से साफ किया गया कि आक्रामकता की शुरुआत चीन की तरफ से की गई। पहले फिंगर 4, गलवान वैली और फिर गोगरा हॉट ङ्क्षस्प्रग इलाकों में। फिर भारतीय सेना ने पैंगोंग इलाके में अगस्त के आखिरी में जवाब दिया। अब दिल्ली की तरफ से साफ किया जा चुका है कि सेनाएं पहले चीन की तरफ से हटाई जाएंगी क्योंकि आक्रामकता की शुरुआत भी उसी की तरफ से की गई। 

वास्तविक नियंत्रण रेखा के दावे को भी नकारा 

इस बीच भारत ने चीन के वास्तविक नियंत्रण रेखा के दावे को भी नकारा। भारत ने साफ कर दिया कि 1959 में एक तरफा रूप से निर्धारित की गई वास्तविक नियंत्रण रेखा को नहीं मानता। भारत ने देश की अखंडता और संप्रभुता का हवाला देते हुए 200 से ज्यादा चीनी ऐप्स पर प्रतिबंध लगाया। 

भारत की तरफ से इमरजेंसी फंड जारी कर हथियार मंगाए गए साथ ही राफेल विमान भी भारत लाए गए। एक्सपर्ट्स का ये भी मानना है कि भारत ने अपनी सीमाओं की संप्रभुता के लेकर बिल्कुल असाधारण स्टैंड लिया जो पहले से बिल्कुल अलग है। अब अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच चीन भी चाहता है कि वास्तविक नियंत्रण रेखा से सेनाएं वापस की जाएं। 


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