महाराष्ट्र में मंदिरों को खोलने की मांग तेज

13 अक्टूबर को धार्मिक-आध्यात्मिक संगठनों की भूख हड़ताल

 

Temple
मुंबई 

कोरोना महामारी की वजह से राज्य में मंदिरों को बंद कर दिया गया है। राज्य के सभी मंदिरों को खोलने की मांग को लेकर 13 अक्टूबर को राज्य के प्रमुख धर्माचार्य, विभिन्न संप्रदायों के साधु-संत और कई धार्मिक और आध्यात्मिक संगठन भूख हड़ताल करेंगे। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष चंद्रकांत पाटिल ने इस आंदोलन का समर्थन करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं से इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने को कहा है। 

पाटिल ने कहा कि संतों की भूमि रही महाराष्ट्र में ठाकरे सरकार ने बार शुरू और मंदिर बंद करने की एक तस्वीर पेश की है। 13 अक्टूबर को राज्य के प्रमुख धर्माचार्यों, विभिन्न संप्रदायों के साधु-संतों, कई धार्मिक और आध्यात्मिक संगठनों द्वारा मंदिरों को खोलने की मांग को लेकर राज्यव्यापी प्रतीकात्मक उपवास रखा जाएगा। बीजेपी इस उपवास का समर्थन कर रही है। इसलिए, पार्टी कार्यकर्ताओं को इसमें सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। 

उन्होंने कहा कि पिछले साढ़े छह माह से भक्तों ने बार-बार मांग की है कि पिछले साढ़े छह महीने से बंद मंदिरों के दरवाजों को खोला जाए, लेकिन महाविकास आघाड़ी सरकार ने इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया है। इसके विपरीत राज्य में मदिरा के बार खोल दिए गए हैं। ऐसे में मंगलवार 13 अक्टूबर को आध्यात्मिक समन्वय मोर्चा के समन्वय से राज्य भर के विभिन्न स्थानों के प्रमुख मंदिरों के सामने भक्तों द्वारा एक प्रतीकात्मक उपवास रखा जाएगा। आंदोलन में विभिन्न संप्रदायों के साधु-संत धर्माचार्य और पुरोहित भाग लेंगे। फूल-विक्रेता, व्यापारी जो अपनी आजीविका के लिए मंदिरों पर निर्भर हैं, वे भी उपवास में शामिल होंगे। इस प्रतीकात्मक उपवास को भारतीय जनता पार्टी का पूरा समर्थन प्राप्त है। भाजपा के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और कार्यकर्ता इसमें सक्रिय रूप से भाग लेंगे। चंद्रकांत पाटिल ने कहा कि कार्यकर्ताओं को कोरोना से संबंधित सभी नियमों का पालन करना चाहिए। 


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