जम्मू कश्मीर में नया दौर

भारत सरकार ने घर और कारोबार के लिए देश के हर नागरिक को धरती के स्वर्ग यानी जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीदने की छूट देकर नए दौर का आगाज कर दिया है. इसके लिए डोमिसाइल की कोई अनिवार्यता नहीं होगी. हाँ खेती योग्य जमीन लेने के लिए डोमिसाइल अनिवार्य होगा. अब देश के उद्यमियों और निवेशकर्ताओं को इसका लाभ उठाना चाहिए, और धरती का स्वर्ग एक बार फिर अपने अतीत के स्वर्णिम काल का साक्षी बने इसमें अपना योगदान देना चाहिए. वैसे भी आतंकवाद वहां दम तोड़ रहा है, चुन-चुन कर आतंकी रोज जहन्नुम रशीद किये जा रहेे है और वहां का आम जन मानस भी इस नए बदलाव का स्वागत कर रहा है. इस बदलाव से जिन निहित स्वार्थी तत्वों मसलन महबूबा-अब्दुला परिवार का नुकसान हो रहा है, उनको छोड़कर सब इसका स्वागत कर रहे है. महबूबा की पार्टी के कई नेता तो उनकी अतिरेकी नीति के खिलाफ विद्रोह का बिगुल भी बजा चुके है और इस्तीफा दे रहे है. प्रशासन अब वहां विकास, शांति और समृद्धि के नए युग को मजबूत करने के लिए प्रयत्न कर रहे है. जैसे-जैसे यह राज्य देश के मुख्य प्रवाह में जुड़ता जाएगा वहां के बर्बादी की ज़िम्मेदार पार्टियां व परिवारवादी,अलगाववादी, विशेषाधिकारवादी, आत्मकेंद्रित, भ्रष्ट और पाकपरस्त ताक़तें स्वयं तिमिर तिरोहित हो जायेंगी. किसी बात की सफलता या विफलता की सबसे बड़ी गारंटी वहां की जनता का रुख होता है. जिस तरह आज जम्मू-कश्मीर की रियाया इस नए बदलाव का, जिसे आज साल भर से ज्यादा हो चुका है, का अभिनंदन कर रही है और उसके विपरीत बोलने वाली शक्तियों का कड़ा प्रतिकार कर रही है और यह कह रही है कि अब्दुल्ला और महबूबा जम्मू-कश्मीर नहीं है. यह साबित हो चुका है कि राज्य की रियाया देश के कोने-कोने की रियाया की तरह इस बदलाव के साथ चट्टान की तरह खड़ी है. इससे नि:संदेह राज्य में नए युग के नीति नियंताओं के मनोबल में वृद्धि होगी, और नवनिर्माण का जो काम वहां साल भर पहले हुए अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के अभूतपूर्व निर्णय के साथ शुरू हुआ, वह कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक, बंगाल से लेकर महाराष्ट्र तक हर भारतवासी के चिर अभिलाषा की पूर्ति है. दुर्भाग्य यह है कि इसे कांग्रेस सहित देश का पूरा विपक्ष अभी तक नहीं समझ पाया है, और घाटी की गुपकार घोषणा करने वाले दल तो अपनी अपनी दुकान बंद होने का रोना रो रहे है. पुराने तौर तरीके पुन: शुरू करने का दिखावा और बेसुरा राग अलाप रहे है. जिसे सुनने को न जम्मू-कश्मीर में कोई तैयार है और न ही देश और दुनिया में. आखिर कब तक गायेंगे? एक न एक दिन गला बैठ ही जाना है, नहीं तो वहां की आवाम ही जिसने इन्हें सुनना बंद कर दिया है इन्हें गायब होने पर मजबूर कर देगी.

पूरा देश एक है तो विशेषाधिकार और विशेष दर्जा क्यों? मोदी सरकार ने पूरे देश की इस पीड़ा को दूर कर इस राज्य में विशेषाधिकार के नाम पर हो रही लूट और आतंक के खेल पर पूर्ण विराम लगा दिया है, जो राज्य ऐसे लोगों और आतंक की चपेट में कई दशकों से था वहां मोदी युग में सकारात्मक बयार बहने लगी, यह क्या कम है. इक्का-दुक्का वारदातें अभी कुछ दिन होती रहेगी, कारण खूंख्वार तत्व समाप्त होने में समय लेते है, परन्तु सुरक्षा बलों का सख्त आतंक निर्मूलन अभियान और प्रशासन का वहां विकास की गंगा बहाने, और स्थानीय लोगों के साथ पूरे देश को उससे जोड़ने का अभियान, पूरे जोश और संजीदगी से चालू है. जिसको वहां की आम जनता और पूरा देश देख रहा है व महसूस कर रहा है. तो अब कश्मीर में नए युग का पहिया बड़ी तेजी से आगे बढ़ रहा है, साथ ही जिस तरह के लक्षण आज दिख रहे है, जल्द ही पीओके भी हमारा होगा. इसलिए हर भारतीय इस कार्य में अपनी भूमिका निभाये और प्रगति के नये अध्याय में भागीदार बने.

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