बिहार में जंगलराज लाने वालों को हराएं: पीएम मोदी

Modi

पटना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सबसे पहले बिहार के दरभंगा में चुनावी रैली की। यहां उन्होंने कहा कि पहले की सरकारों को मंत्र था- पैसा हजम, परियोजना खत्म। बिहार में जंगलराज लाने वालों को फिर हराएंगे। इसके बाद मुजफ्फरपुर की सभा में तेजस्वी पर तंज कसते हुए कहा कि जंगलराज के युवराज को बिहार की जनता अच्छी तरह से जानती है। इनका पुराना ट्रैक रिकॉर्ड देखकर जनता इनसे और क्या अपेक्षा कर सकती है।

मजबूरी में ताली बजानी पड़ रही

मिथिला के महान लेखक विद्यापति जी ने सीता मैया से प्रार्थना की थी। आज देखें तो बीते 15 वर्षों में नीतीश जी के नेतृत्व में बहुत आगे बढ़ा है। माता सीता आज अपने नैहर को निहार रही होंगी। सदियों की तपस्या के बाद अब अयोध्या में भव्य निर्माण शुरू हो गया है। वो सियासी लोग जो बार-बार तारीख पूछा करते थे, बहुत मजबूरी में अब वो भी तालियां बजा रहे हैं। माता सीता के इस क्षेत्र में आकर मैं यहां के लोगों को राम मंदिर निर्माण की बधाई देता हूं, क्योंकि आप उसके प्रमुख हकदार हैं। भाजपा और एनडीए की पहचान यही है कि जो कहते हैं वो करके दिखाते हैं। पहले की सरकारों का मंत्र था- पैसा हजम, परियोजना खत्म। उन्हें कमीशन शब्द से इतना प्रेम था कि कनेक्टिविटी पर कभी ध्यान ही नहीं दिया। कोसी सेतु के साथ क्या हुआ, मैं बहुत अच्छे से जानता हूं। केंद्र में एनडीए के सरकार बनने के बाद और यहां नीतीश जी का सहयोग मिलने के कारण इस सेतु का निर्माण पूरा हो पाया।

इससे 300 किमी की दूरी 20-22 किलोमीटर में सिमट गई। बिहार के लोगों को ऐसे ही विकास के कामों को वोट करना है। जिनकी ट्रेनिंग कमीशनखोरी की हो, वो बिहार के हित में नहीं सोच सकता। ऐसे लोगों के राज में अपराध इतना फला-फूला कि लोगों का जीना मुश्किल हो गया। ये वो लोग हैं जो कर्जमाफी में भी घोटाले कर जाते हैं, ये वो लोग हैं जो लोगों को रोजगार देने को भी कमाने का जरिया मानते हैं। ये बिहार के विकास की परियोजनाओं के पैसे पर नजरें गड़ाए बैठे हैं।

बिहार में रोजगार-स्वरोजगार लाएंगे

आत्मनिर्भर बिहार में उद्योग के नए अवसर बनेंगे। युवाओं के लिए रोजगार-स्वरोजगार लाएंगे। गरीबों के लिए जो 10फीसदी आरक्षण की व्यवस्था की गई है, उसका लाभ भी इस क्षेत्र के गरीबों को मिल रहा है। मिथिलांचल की कनेक्टिविटी को पीएम पैकेज से भी बहुत ताकत मिल रही है। इससे यहां हजारों किलोमीटर की सड़कों का काम हुआ है। 55 हजार करोड़ से भी अधिक बिहार के रोड़ नेटवर्क पर खर्च किए जा रहे हैं।


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