पाक का ब्लैक लिस्ट में जाना तय: भारत


नई दिल्ली

आतंकवादियों के पनाहगाह बनने पर एफएटीएफ की लिस्ट में शामिल पाकिस्तान अब इस सूची से बाहर निकलने के लिए हर पैंतरा आजमाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे ही एक प्रयास में पाकिस्तान अब वित्तीय कार्रवाई कार्य बल की ग्रे लिस्ट से बाहर निकलने के लिए अमेरिकी लॉबिंग फर्मों पर भरोसा कर रहा है । क्योंकि इस्लामाबाद के भाग्य का फैसला करने के लिए वैश्विक मनी लॉड्रिंग और आतंकवादी वित्तपोषण के पहरेदारों की वर्चुअल मीटिंग इसी महीने में होने जा रही है ।

एफएटीएफ में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले सरकारी अधिकारियों ने बताया कि डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन के साथ लॉबी करने के लिए टेक्सास स्थित लिंडन स्ट्रैटेजीज को पाकिस्तान सरकार ने काम पर रखा है। एक अधिकारी ने कहा, 'पाकिस्तान को अपना नाम ग्रे सूची से हटाने के लिए 39 में से 12 देशों के समर्थन की जरूरत है। अकेले अमेरिका 20 देशों के ब्लॉक को नियंत्रित करता है।'

पेरिस स्थित एफएटीएफ की बैठक 21 से 23 अक्टूबर तक होने वाली है । पाकिस्तान के ऊपर संयुक्त राष्ट्र नामित मौलाना मसूद अजहर , हाफिज सईद,जाकिर उर रहमान लखवी जैसे आतंकियों के अलावा अल-कायदा , जैश-ए-मोहम्मद , लश्कर-ए-तैयबा और हक्कानी नेटवर्क जैसे अंतर्राष्ट्रीय आतंकी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव है । अमेरिका ने पहले इन व्यक्तियों और संगठनों के खिलाफ कार्रवाई के पाकिस्तान के दावों को खारिज कर दिया था। आतंकवाद के खिलाफ अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट 2019 ने दावा किया था कि पाकिस्तान ने इस साल की शुरुआत में एफएटीएफ के सामने यह दावा किया था कि आतंकवादी मसूद अजहर 'लापता' है ।


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