रेस्टोरेंट में खाना लगता है ज्यादा टेस्टी?

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पहली डिश सर्व करने के बाद उन्हें रिसर्च सवाल यानी क्वेश्चनेयर भरने को कहा गया। शोधकर्ताओं ने उनमें स्वाद के अलावा सुनने, उत्तेजनाओं, ध्वनी और सुगंध आदि में भी वृद्धि देखी। 

हर्टफोबशायर के एक रेस्टोरेंट मालिक गार्न्सवर्दी ने द टेलीग्राफ अख़बार को बताया कि पहला टेस्ट आँखों में होता है इसलिए खाने के दौरान लाइटिंग काफी अहम होती है। स्टडी कहती है कि लाइटिंग से खाना ज्यादा स्वादिष्ट लगा। कुछ लोगों ने माना कि बाहर खाने के दौरान कम लाइट का होना काफी आरामदायक होता है। नोर्म, द स्टैफोर्ड में निर्देशक बेन टिश ने कहा कि डिनर में रोशनी लोगों को लम्बे समय तक रहने के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने कहा कि रोमांटिक डिनर के लिए यह अच्छा है। डिनर के लिए अक्सर बाहर जाने वाले लोगों में दो प्रवृत्ति के लोग देखे जाते हैं। कुछ लोग गहरी लाइटिंग में बैठकर खाना पसंद करते हैं। दूसरी तरफ कुछ लोग ऐसे भी होते हैं, जो प्राइवेसी चिंताओं के कारण कम या मध्यम लाईट में बैठकर अपने डिनर का आनन्द उठाना पसंद करते हैं


 हमारी इंद्रियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और हमारी प्रतिक्रिया शायद ही कभी अलग-थलग होती है। यह दो या अधिक इंद्रियों का एक संयोजन है। एक अध्ययन द्वारा सामने आया कि स्थिति के अनुसार खाने का टेस्ट पता चलता है। चमकदार रोशनी वाले कमरे में बैठे मेहमानों को कम रोशनी में बैठे मेहमानों की तुलना में खाना ज्यादा स्वादिष्ट लगा। नीदरलैंड्स के मास्टरिच यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कहा कि हमने अपनी रिसर्च में पाया कि एक रेस्टोरेंट में रोशनी को संशोधित करने से न केवल माहौल बदल जाता है, बल्कि वहां परोसे जाने वाले भोजन का स्वाद भी प्रभावित होता है। शोधकर्ताओं ने 138 लोगों पर रिसर्च की। उन्हें रेस्टोरेंट में लेकर जाया गया और अलग-अलग दिन लाइट में बदलाव किया गया। 

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