बिहार चुनाव में अब उम्र घोटाला

पटना

बिहार चुनाव के दूसरे फेज के लिए कैंडिडेट्स का नॉमिनेशन हो चुका है। हमने दोनों बड़े गठबंधनों के उन कैंडिडेट्स की डीटेल निकाली, जो पहले भी चुनाव लड़ चुके हैं, तो कई कैंडिडेट्स की उम्र में घोटाला दिखा। जिन कैंडिडेट्स की उम्र में एक साल का हेरफेर था, उन्हें छोड़ने के बाद भी 10 नाम ऐसे मिले, जिनकी उम्र में घोटाला था।

रेणु देवी की उम्र 5 साल में 8 साल बढ़ी है। इस बार उन्होंने बेतिया से एफिडेविट दाखिल किया है, उसमें अपनी उम्र 60 साल बताई है। जबकि, 2015 के वक्त इनकी उम्र 52 साल थी। रवि ज्योति इस बार राजगीर सीट से कांग्रेस के टिकट पर लड़ रहे हैं। जिनकी उम्र 5 साल में 5 साल नहीं, बल्कि 9 साल बढ़ी है। 2015 में वो 42 साल के थे और इस बार एफिडेविट में अपनी उम्र 51 साल बताई है। शशि यादव दीघा सीट से भाकपा (माले) की कैंडिडेट हैं। शशि यादव ने 2014 का लोकसभा चुनाव नालंदा सीट से लड़ा था, लेकिन हार गई थीं। उस समय अपनी उम्र 40 साल बताई थी। 6 साल बाद वो दीघा से विधानसभा चुनाव लड़ रही हैं और इस बार उन्होंने अपनी उम्र 51 साल बताई है। नौतन सीट से भाजपा के उम्मीदवार हैं। उनके एफिडेविट में 2015 में उम्र 60 साल बताई गई थी और इस बार अपनी उम्र 61 साल बताई है। पंकज मिश्रा जदयू के टिकट पर लड़ रहे हैं। 2015 में ये 44 साल के थे और अब 46 साल के हैं। आशा देवी उन नेताओं में हैं, जिनकी उम्र 5 साल में दो साल ही बढ़ी। आशा देवी 2015 में 52 साल थीं और अब 54 की हैं। रणविजय सिंह भाजपा के उम्मीदवार हैं। जिनकी 2015 में अपनी उम्र 42 साल बताई थी और इस बार 44 साल बताई है। सुनील कुमार 2015 में 39 साल के थे तो इस बार अपनी उम्र 42 साल बताई है। जदयू के हरिनारायण सिंह की उम्र 2015 में 75 साल थी। इस बार एफिडेविट में इन्होंने अपनी उम्र 73 साल बताई है। जदयू की पूनम देवी यादव 2015 में उम्र 48 साल है। इन 5 सालों में इनकी उम्र जरा भी नहीं बढ़ी है। वो तब भी 48 की थीं और अब भी 48 की ही हैं।


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