कृषि कानून की त्रुटि दूर करने की जरूरत: ठाकरे

मुंबई
केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित किए गए कृषि विधेयक में कई त्रुटियों को सुधारने की आवश्यकता है। किसानों के हित में सभी राजनीतिक दलों को एक साथ आना चाहिए। मंगलवार को सह्याद्रि अतिथि गृह में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में किसान कानून को लेकर किसान संगठनों की बैठक आयोजित की गई थी, जिसमें बोलते हुए मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि हम केंद्र सरकार के खिलाफ नहीं है, लेकिन कोई भी विधेयक या कानून का राज्य में आंख बंद समर्थन नहीं किया जा सकता। सीएम ठाकरे ने कहा कि हमारी भूमिका किसानों के हित वाली है, इसे चाहे किसी पार्टी ने लागू किया हो, क्योंकि केंद्र सरकार ने जो कृषि कानून लागू किया है, उसमें कई त्रुटियां है, जिसे सुधारने की आवश्यकता है। ठाकरे ने कहा कि इस विधेयक को लागू करने से पहले सभी को विश्वास में लेना आवश्यक था और कम से कम किसान संगठनों के साथ पहले से चर्चा करना चाहिए। हम विकास या सुधार के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार जब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू की गई थी, तब उसमें खामिया पाई गई थीं, जिसे सुधारने के बाद देश में उसे लागू किया गया था। इसी प्रकार किसानों से संबंधित विभिन्न पिछले कानूनों के कार्यान्वयन पर अनुभवों का आदान-प्रदान करने की आवश्यकता थी। सीएम ने कहा कि हमारा देश दुनिया का सबसे बड़ा कृषि प्रधान देश है। अगर हम भोजन देने वाले को खुश करना चाहते हैं, तो कानूनों को समय-समय पर संशोधित करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून पर अगला फैसला राज्य में किसान संघों के प्रतिनिधियों द्वारा रखे गए सुझावों पर विचार करने के बाद लागू किया जाएगा। बैठक में उपमुख्यमंत्री अजित पवार, राजस्व मंत्री मंत्री बालासाहेब थोरात, लोक निर्माण मंत्री अशोक चव्हाण, अन्न आपूर्ति मंत्री छगन भुजबल, मंत्री जयंत पाटिल, कृषि मंत्री दादाजी भूसे मंत्री, सुनील केदार, मंत्री बालासाहेब पाटिल, मुख्यमंत्री के प्रमुख सलाहकार अजोय मेहता, अतिरिक्त मुख्य सचिव सीताराम कुंटे, मुख्यमंत्री के अतिरिक्त मुख्य सचिव आशीष कुमार सिंह, मुख्यमंत्री सचिव के प्रमुख सचिव विकास खड़गे, प्रमुख सचिव विपणन विभाग अनूप कुमार, कृषि विभाग के सचिव उपस्थित थे। इसके साथ किसानों के प्रतिनिधियों ने सरकार से कृषि न्यायालय की स्थापना और बाजार समितियों को मजबूत करने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की।
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