लंदन में लगेगी शाहरुख-काजोल की मूर्ति

Shahrukh Kajol

हिंदी सिनेमा में प्रेम कहानियों का फ़िल्मों का लम्बा इतिहास रहा है। मगर दिलवाले दुल्हनियां ले जाएंगे में राज और सिमरन ने मोहब्बत की जो कहानी लिखी, उसका असर कभी मराठा मंदिर में 1000 ह़फ्ते तक चलने वाले शो, तो कभी अमेरिकी राष्ट्रपति के भाषणों में ज़िक्र के रूप में दिखता रहा है। ...और अब, मोहब्बत की इस सुपर हिट कहानी के नायक-नायिका को एक मूर्ति की सूरत में ढालकर लंदन के मशहूर लीसेस्टर स्क्वायर चौराहे पर हमेशा के लिए अमर कर दिया जाएगा। किसी हिंदी फ़िल्म के लिए ऐसा पहली बार होगा। पिछली सदी के आख़िरी दशक के मध्य में आयी दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे के सफ़र की सिल्वर जुबली मनाने का इससे बेहतर तरीक़ा और क्या हो सकता है। आख़िर लंदन भी तो इस प्रेम कहानी का एक किरदार रहा है। 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज़ हुई दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे में राज बने शाहरुख़ ख़ान, सिमरन के किरदार में काजोल और बाबूजी के रोल में अमरीश पुरी आज तक यादों में उसी तरह रचे-बसे हैं, जैसे अपनी ही किसी जानने वाले की कहानी हो। दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे सिफ़र् 4 करोड़ की लागत से बनी थी, जबकि इसने घरेलू बॉक्स ऑफ़िस पर 89 करोड़ और विदेशों में 13.50 करोड़ की कमाई की थी। दुनियाभर में फ़िल्म ने 102.50 करोड़ जमा किये थे।


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