फिर गरमाया आरक्षण का मुद्दा

 


जयपुर

राजस्थान में गुर्जर आरक्षण का मुद्दा फिर गरमा गया हैं और इसे लेकर शुक्रवार को भरतपुर जिले के बयाना के अड्डा गांव में गुर्जर महापंचायत शुरू हुई। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के आह्वान पर बुलाई गई महापंचायत में गुर्जर समाज के लोग आए। बताया जा रहा है कि समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला महापंचायत में शामिल हुए। इसमें करीब 80 गांवों के लोगों को बुलाया गया है। वहीं राजस्थान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और शिक्षा मंत्री गोविंद सिंह डोटासरा ने आरक्षण को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे गुर्जर नेताओं से मसला बातचीत के जरिए सुलझाने की अपील की हैं। महापंचायत के मद्देनजर मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया हैं जिले के बयाना, बैर, भुसावर, रुपवास समेत कई जगह शुक्रवार रात 12 बजे से इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गईं। पुलिस के अनुसार कानून एवं सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस के कई बड़े अधिकारियों सहित दो हजार से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

क्या है मांग

गुर्जर समाज आरक्षण को केन्द्र की नौवीं अनुसूची में शामिल करने, बैकलॉग की भर्तियां निकालने एवं प्रक्रियाधीन भर्तियों में पूरा पांच प्रतिशत आरक्षण का लाभ देने, एमबीसी कोटे से भर्ती हुए 1252 कर्मचारियों को नियमित करने, आंदोलन के शहीदों के परिजनों को नौकरी एवं मुआवजा तथा मुकदमों को वापस लेने की मांग कर रहा है।

उधर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनियां ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर इस समस्या को उलझाने का आरोप लगाते हुए कहा है कि इस समस्या को कांग्रेस सरकार ने उलझाया है। वह हमेशा आश्वासन देते रहे और नतीजा गुर्जर सड़कों पर उतर रहे हैं जबकि सरकार की जिम्मेदारी है और वह अपनी जिम्मेदारी से भाग रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को इसका कोई समाधान करके प्रदेश की शांति व्यवस्था का ध्यान रखना चाहिए। डोटासरा ने शनिवार को सोशल मीडिया के जरिए गुर्जर नेताओं से अपील की कि यह मामला बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंदोलनों में दूसरे लोग फायदा उठाते हैं और नुकसान प्रदेश की जनता का होता है। डूंगरपुर मामला इसका उदाहरण हैं। उन्होंने कहा कि गुर्जर नेताओं को सरकार द्वारा गुर्जर आरक्षण के संबंध में बनी कमेटी के साथ बात करनी चाहिए। उन्होंने आश्वासन देते हुए कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार उनकी हर जायज मांग एवं समस्या के समाधान के लिए कटिबद्ध हैं। डोटासरा ने कहा कि जहां तक गुर्जरों को आरक्षण को नौवीं अनुसूची में डालने का मामला है, सभी जानते हैं कि यह केंद्र सरकार के हाथ में है।


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