रिपब्लिक टीवी के खिलाफ पुलिस ने दर्ज की एफआईआर

पुलिस महकमे को बदनाम करने का आरोप

Republic TV

मुंबई

मुंबई पुलिस ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ एक और एफआईआर दर्ज की है। मुंबई पुलिस आयुक्त परम बीर सिंह समेत पूरे पुलिस महकमे को बदनाम करने के आरोप में क्राइम ब्रांच के उप निरीक्षक शशिकांत पवार की शिकायत पर एनएम जोशी मार्ग पुलिस स्टेशन में यह एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में कहा गया है कि रिपब्लिक टीवी ने अपने कार्यक्रम में दावा किया कि परम बीर सिंह के खिलाफ विद्रोह हो रहा है और उनके कई मातहत उनसे खुश नहीं हैं। इस कार्यक्रम के जरिए सिंह के खिलाफ असंतुष्टि फैलाने की कोशिश की गई। मामले में आईपीसी की धारा 500, 34 के साथ पुलिस कानून की धारा 3 (1) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है। मामले में रिपब्लिक की डिप्टी न्यूज एडीटर सागरिका मित्रा, एंकर- सीनियर एसोसिएट एडीटर शिवानी गुप्ता, डिप्टी एडीटर शावन सेन, एक्जिक्यूटिव एडीटर निरंजन नारायण स्वामी, एडिटोरियल स्टाफ के सदस्यों, न्यूज रूम इंचार्ज और समाचार चलाने में मदद करने वाले दूसरे लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। शिकायत में दावा किया गया है कि रिपब्लिक के अपने कार्यक्रम के जरिए मुंबई पुलिस के साथ-साथ शहर की भी छवि धूमिल करने की कोशिश की।

उल्लेखनीय है कि फर्जी टीआरपी मामले में पुलिस ने पहले टीवी टुडे नेटवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज किया था, लेकिन उसके सबूत नहीं मिले, लेकिन जांच करते हुए पुलिस को तीन ऐसे चैनलों के बारे में जानकारी मिली थी जो पैसे देकर टीआरपी बढ़वाते थे। मुंबई पुलिस कमिश्नर परम बीर सिंह ने पत्रकार परिषद में रिपब्लिक टीवी और दूसरे दो चैनलों का नाम फर्जी टीआरपी में लिया था। जिसमें पहले चार लोगों को गिरफ्तार किया गया था। शुरूआती जांच के दौरान पुलिस ने इस मामले में विशाल भंडारी और बोमपल्ली राव नाम के हंसा के दो पूर्व कर्मचारियों और फक्त मराठी चैनल के मालिक शिरीष शर्मा और बाक्स सिनेमा चैनल के मालिक नारायण शर्मा को गिरफ्तार किया था, जबकि बीते सप्ताह उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से विनय त्रिपाठी नाम के हंसा के पूर्व कर्मचारी को गिरफ्तार किया था। वहीं मुंबई पुलिस कमिश्वर परम बीर सिंह ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि मजिस्ट्रेट के सामने चार लोगों का बयान देकर खास चैनल देखने के लिए पैसे लेने की बात स्वीकार की है। इनमें से तीन लोगों को रिपब्लिक चैनल देखने के पैसे मिले थे, जबकि एक व्यक्ति ने दूसरा चैनल देखने के लिए पैसे मिलने की बात स्वीकार की है।

 

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