आतंकवाद व कट्टरतावाद पर लगाम जरूरी

फ्रंस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां द्वारा इस्लामिक आतंकवाद की निंदा करने के बाद तुर्की, जोर्डन सहित कई देशों द्वारा उसके सामानो के बहिष्कार की घोषणा, और इन देशों द्वारा इस्लामिक कट्टर पंथियों द्वारा फ्रांस में एक शिक्षक की गला काट कर हत्या किये जाने के संदर्भ में एक भी शब्द न उच्चारित करना इनके इस दोगलेपन का परिचायक है. जिसका कहर आज दुनिया का एक बड़ा हिस्सा झेल रहा है. ये देश ऐसे संगीन अपराध जो धर्म के नाम पर किये जाते है, उसकी निंदा करने तक से कतराते है, और यदि कोई देश या उसका प्रमुख इसकी निंदा करता है तो उसके भी पीछे पड़ जाते है. इसे लेकर दुनिया के सभ्य समाज को सतर्क होने की जरूरत है. कोई देश किस तरह चलेगा उसका अपना तौर-तरीका है. उसका अपना विधान है. नागरिक उसकी सीमा में रहकर अपनी क्रिया-प्रतिक्रया देते है और अपना काम करते है. यदि किसी ने ऐसा कार्टून बनाया या लेख लिखा या विचार व्यक्त किया जो उसके देश के संविधान और उसके धर्म के अनुसार सही है, और दूसरे व्यक्ति के धर्म या विचार से सही नहीं है तो दूसरा उसका गला काट देगा? और इस पर यदि वहां का शासन प्रमुख अपनी प्रतिक्रया देगा या उनसे लड़ने के लिए कमर कसेगा तो उसके उत्पादों का बहिष्कार करोगे? धर्म का नाम लेकर संगीन से संगीन जुर्म करने पर तुर्की व पाक जैसे स्वयं घोषित इस्लाम के रक्षक कोई प्रतिक्रिया नहीं देते और मौन साध लेते है. लेकिन उसका प्रतिकार करने पर इन्हें तुरंत इस्लाम खतरे में पड़ा नजर आता है, और उसका विरोध शुरू हो जाता है. यह दोहरी मानसिकता और हठधर्मिता है जो दुनिया में अपनी चलाने की कुत्सित मानसिकता का ओछा प्रदर्शन है. जिसकी जितनी संभव हो उतनी निंदा होनी चाहिए. दुनिया के जो भी देश इस ओछी मानसिकता के भुक्तभोगी या शिकार है उन्हें एकजुट होकर इसके प्रतिकार के लिए आगे आना होगा. आज के दौर में जब सौदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में कट्टरपंथी तौर-तरीकों में बदलाव हो रहा है, महिलाओं को भी अधिकार दिया जा रहा है, इसके साथ अन्य तमाम तरह की छूटें दी जा रही है तो तुर्की कट्टरवाद का नया चैंपियन बनने पर आमादा है. जिस तरह की भूमिका तुर्की के साथ कुछ और देशों ने फ्रांसीसी उत्पादों के बहिष्कार करने के लिए अंगीकार की है, यह एक तरह से इस्लामी आतंकवाद, किसी भी देश में अपनी मनमानी चलाने की और वह न होने दें पर उसका हिंसक प्रतिकार करने की कुप्रवृत्ति का समर्थन है, जो किसी भी तरह से बढ़ने नहीं दिया जा सकता. हर व्यक्ति, हर देशवासी का दुनिया को देखने का अपना-अपना नजरिया है, दींन और दुनिया को सिर्फ किसी धर्म-विशेष के नज़रिये से देखना असंभव है. किसी का नजरिया आपसे जुदा है तो उसे जान से मार देने वाली शैली किसी भी सय समाज के लिए शोभनीय नहीं है. अभी तक तो आतंक के मक्का ने ही दुनिया को हैरान-परेशान कर रखा था, अब उसके साथ ही इस्लामिक दुनिया का चौधरी बनने का स्वप्न देखने वाला तुर्की भी शामिल है. ये दोनों मिलकर अब गुमराह और इस्लाम का बेजा इस्तेमाल करने वाले समाज व मानवता विरोधी तत्वों को हवा देने वाले नए नेता बन रहे है. ये कितने दींन-ईमान हीन है इसका सबसे बड़ा सबूत चीन में उइगर मुसलमानों के साथ हो रही लोमहर्षक ज्यादतियां है जो इनके कानों में नहीं सुनायी दे रही है. ये चुपी साधे रहते हैं, कारण चीन इनका आका है, उसके खिलाफ कुछ नहीं बोल सकते. लेकिन जहां कुछ नहीं हो रहा है वहां के बारे में बिना विष वमन किये नहीं रह सकते. इसके पहले इनकी यह भयंकर प्रवृत्ति विश्व के लिए और ख़तरा बने इस प्रवृत्ति पर कुठाराघात बहुत जरूरी है. इसलिए इसके कुख्यात अड्डों और उसे साधन-सुविधाएं उपलब्ध करनेवालों पर निर्णायक प्रहार जरूरी है. कारण ये विश्व को आतंकित कर अपनी बात मनवाना चाहते है, जिस पर रोक लगाना सय समाज की जिम्मेदारी है जिसेे उसे निभाना है. वह चाहे तुर्की पाकिस्तान हो या कोई और, उसकी मुश्के बांधना जरूरी है.

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget