बागियों पर सख्त भाजपा

पटना

नेशन फर्स्ट, पार्टी नेक्स्ट तब पर्सनल इंट्रेस्ट यानी देश पहले, तब दल और उसके बाद व्यक्तिगत हित। यह नारा भाजपा का है जिसे पार्टी के हर छोटे-बड़े नेता समय-समय पर दोहराते रहते हैं । लेकिन चुनाव जो न कराए। गठबंधन में भाजपा के खाते से सीट क्या गई कि दल और देश की दुहाई देने वाले नेताओं ने इस सिद्धांत को ही तिलांजलि दे दी । पहले चरण के 71 सीटों पर हो रहे चुनाव में अब तक आधा दर्जन से अधिक चर्चित चेहरों ने पार्टी का दामन त्याग कर दूसरे दलों से चुनावी मैदान में कूद गए हैं।

बागियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भाजपा नेतृत्व अब सख्त हो गया है। जिन-जिन नेताओं ने अब तक नामांकन कर दिया है, उन्हें नाम वापसी की तिथि तक का समय दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने फोन कर ऐसे नेताओं को साफ कहा है कि वे नाम वापस लें वरना उन्हें छह साल के लिए दल की प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया जाएगा। हालांकि दल के इस संदेश का बागियों पर कितना असर होगा, यह देखने लायक होगा।

वहीं भाजपा सूत्रों की मानें तो पार्टी में बागियों का सिलसिला यही थमने वाला नहीं है। नेताओं की मानें तो तीन चरण में हो रहे बिहार चुनाव का नामांकन खत्म होने तक कम से कम दो दर्जन जाने-पहचाने चेहरा भाजपा का दामन थाम सकते हैं। दरअसल साल 2015 के चुनावी मैदान में भाजपा 157 सीटों पर चुनाव लड़ी थी। इसका मूल कारण था कि एनडीए में वह पिछली बार सबसे बड़ी पार्टी थी। लेकिन इस बार एनडीए में जदयू के आने पर वह बड़ी पार्टी बन चुकी है। जदयू 115 तो भाजपा 110 सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसे में पिछली बार की तुलना में इस बार पार्टी 47 सीटों पर चुनाव नहीं लड़ पाएगी। ऐसे में जिन-जिन नेताओं ने पिछली बार पार्टी के टिकट पर चुनावी मैदान में भाग्य आजमाया था, वे इस बार भी दूसरे दलों का दामन थामकर अपनी किस्मत आजमाना चाह रहे हैं।


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