दीपों की बिक्री में 25 फीसदी गिरावट, कोरोना का साइड इफेक्ट


मुंबई

कोरोना महामारी ने मानो त्योहारों की रौनक ही छीन ली है। महामारी का साइड इफ़ेक्ट दीपों की बिक्री पर देखने को मिल रहा है। दीप बनाने वाले थोक और खुदरा विक्रेताओं की माने तो आम दीवाली की तुलना में इस वर्ष बिक्री में लगभग 25 फीसदी की गिरावट आई है।

जिस तरह बिना शक्कर के मिठाई नहीं होती उसी प्रकार बिना दीपों के दीपावली की कल्पना करना असंभव है। रोशनी के इस त्योहार में लोग अपने घरों को दीपों से जगमगाते हैं, लेकिन इस बार दीपों की बिक्री में काफी गिरावट दर्ज की गई है। मुंबई के धारावी में काफी व्यापारी बड़ी संख्या में मिट्टी के दीप बनाते हैं। दीवाली के पहले धारावी में खरीदारों की काफी चहल पहल देखने को मिलती है, लेकिन इस बार मामला थोड़ा ठंडा चल रहा है।

अभी भी 10 हजार दीप नहीं बिके

दीपों के थोक विक्रेता श्याम चित्रोला ने बताया कि इस बार उनका धंधा काफी मंदा है। गत वर्ष हमने 50 हजार मिट्टी के दीप बनाए और सब के सब बिक गए थे। जबकि इस बार कोरोना महामारी को देखते हुए हमने मात्र 20 हजार दीप बनाए थे, लेकिन अभी भी 10 हजार दीप नहीं बिके हैं। कोरोना के कारण पुलिस और बीएमसी के अधिकारी धंधा लगाने ही नहीं दे रहे हैं। डर के कारण लोग घरों से बाहर नहीं निकल रहे हैं। इस बार बहुत कम खरीदार आ रहे हैं।

खरीदार भी बहुत कम आ रहे

दूसरे दीप विक्रेता नरसी पटेल ने बताया कि वैसे तो हम 25 से 30 हजार मिट्टी के बड़े दिए और लोटे बनाते हैं, लेकिन इस बार हमने 15 हजार दीप बनाए, जिसमें से लगभग 5 हजार से अधिक दीप नहीं बिके हैं। पाबंदियों के चलते खरीदार भी बहुत कम आ रहे हैं।

तो नुकसान होना तय है

दीपों के खुदरा व्यापारी सुरेश पटेल ने बताया कि दीप बिके नहीं ऐसा हो नहीं सकता, लेकिन आर्थिक तंगी के चलते खरीद की मात्रा कम जरूर हुई है। पहले जो लोग 20 से 30 दीप खरीदते थे अब लोग 10 ही खरीद रहे हैं। ऐसे में अधिक माल जिन्होंने खरीदा होगा और उतनी बिक्री नहीं हुई तो नुकसान होना तय है।


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