मंदिरों को खोलने को लेकर सरकार गंभीर नहीं: दरेकर

pravin darekar

मुंबई

राज्य में महाविकास आघाड़ी सरकार की सत्ता आने के बाद सरकार की भूमिका पूरी तरह बदल गई है। पहले मंदिर फिर सरकार का नारा देने वाली शिवसेना अब मंदिरों को खोलने से क्यों दूर भाग रही है? रविवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए विधान परिषद के विपक्ष नेता प्रवीण दरेकर ने सरकार पर यह आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि मंदिरों को खोलने के लिए भाजपा सहित विभिन्न संगठनों ने आंदोलन किया। जिसके बाद अपेक्षा थी कि सरकार मंदिरों को खोलेगी, लेकिन दुर्भाग्य से सरकार किसी भी मुद्दे पर गंभीर नहीं है। मंदिर के माध्यम से बड़ी संख्या में रोजगार उपलब्ध होता है, इसमें मंदिरों के पुजारियों के साथ -साथ विभिन्न लोगों पर अकाल का समय आ गया है। नियम बनाकर मंदिर खोलने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन यह सरकार अहंकार से भरी है। सरकार इस बात पर अधिक केंद्रित है कि विपक्ष के लोग क्या सोचते हैं। सरकार को यह मालूम होना चाहिए कि विपक्ष की भूमिका हमेशा जनहित कार्यों को सोचने वाली होती है। सरकार को चेतावनी देते हुए दरेकर ने कहा कि अगर सरकार मंदिरों को नहीं खोलती है तो राज्यभर में मंदिर को खोलने के लिए आंदोलन शुरू हुआ तो भाजपा उनके साथ खड़ी रहेगी और इसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी। उन्होंने कहा कि बाहर चिल्लाना आसान है, लेकिन सरकार में शामिल होने के बाद स्थिति से बाहर निकलने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है।


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