दुनिया कब तक झेलेगी आतंक का दंश

पूरा यूरोप आज बहुत ही गंभीरता पूर्वक और सतर्क दृष्टि से अपने चारो ओर नजर रख रहा है. फ्रांस के बाद आस्ट्रिया में इस्लामिक स्टेट के आतंकी द्वारा गोलियो की बौछार ने पांच लोगों की जान ले ली, और दर्जनों को घायल कर दिया. एक ज़माना था जब ऐसे ही हमले हमारे यहाँ भी बड़े ही भीभत्स तरीके से किए जाते थे, लेकिन मोदी युग की सख्ती के समाने अब वे भी पानी मांग रहे है, ऐसा नहीं है कि उन्हें सद्बुद्धि आ गयी है, जिससे वे ऐसा कुछ नहीं कर रहे है. मोदी युग में हमारी खुफ़िया और सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी उन्हें उनके कुत्सित मंसूबो को पूरा करने के पहले ही उन्हें दबोच रही है. हम दशकों से यूरोप, अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र संघ को इस खतरे के बारे में आगाह करते रहे हैं, तब कोई नहीं जागा लेकिन जैसे-जैसे उसने अपने क्रूर फांस में यूरोप और अमेरिका को लिया तो सब जग गए, परंतु तब तक उनकी पहुँच विश्वव्यापी हो गयी है. आज वह अपनी क्रूरता व हैवानी गतिविधियों से पूरी दुनिया को थर्रा रहे हैं, तो अब लड़ाई अकेले-अकेले लड़ने का समय नहीं है. जरूरत है एक ऐसे संयुक्त मंच की जो इन पर हर तरह से कड़ी कारवाई करते हुए इनका समूल विनाश कर सके. इसके लिए भुक्त भोगी देशों को एक होना पडेगा, और उस विचारधारा को केंद्र में रखकर प्रहार करना होगा, जो एक आदमी को ऐसी निर्दयी मशीन में बदल देती है जो बिना किसी कारण के किसी स्थान विशेष में जाकर निर्दोष और निश्चिंत भीड़ पर जानलेवा हमला कर देता है, भले ही उसमें उसकी जान चली जाय, या वह पकड़ा जाय. अब समय आ गया है कि प्रहार उस विचारधारा पर, बुनियादी सुविधायें देने वालों और उसका समर्थन करे वालों सब पर एक साथ होना चाहिए. कब हो, कैसे हो यह सबको मिलकर तय करना होगा, नहीं तो ये जिस तरह पहले फ्रांस में लोगों को मार कर उसे भयाक्रांत किये हुए है और जिस तरह इन्होने आस्ट्रिया में निर्दोषों को निशाना बनाया, इनका यह मारने और डराने के बलबूते लोगों को आंतकित करने का और अपनी मनमानी कराने का खेल जारी रहने वाला है. इन पर लगाम लगाने के लिए दुनिया को चौतरफा हमला करना होगा, और इसे रोकना ही होगा. आखिर दुनिया कब तक आतंक का दंश झेलेगी. जब तक इसके विचार से लेकर कार्यान्वयन तक पूरे तंत्र को विनष्ट नहीं किया जाता तब तक दुनिया का एक बड़ा वर्ग इसे झेलने को अभिशप्त होगा. इसलिए इसकी भयावहता और क्रूरता का अंदाजा लगाकर और पूरे तंत्र की पहचान कर, उस पर निर्णायक प्रहार वक्त की माग है.

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