बालों के लिए तिल के तेल के फायदे और नुकसान

sesame oil

ये भारत की प्रमुख तिलहन फसल है। आयुर्वेद के जानकार हजारों सालों से इसका प्रयोग भोजन, पूजा-पाठ और औज्ज्षधि के रूप में करते आए हैं। तिल के फायदे की वजह से ही ये भारतीय संस्कृति और त्योहारों का अटूट हिस्सा रहा है।आजकल लोग तिल के तेल के गुणों के बारे में बखूबी जानते हैं। बल्कि ये बात अब कई रिसर्च में भी साबित हो चुकी है कि तिल का तेल बालों के लिए बेहद गुणकारी है। यही कारण है कि अब कई स्किन और हेयर केयर प्रोडक्ट्स भी तिल के तेल का प्रयोग करते हैं। 


 जाना पसंद नहीं करेंगे? 

बालों का पतलापन और हेयर लॉस तिल का तेल ओमेगा-3 और ओमेगा 6 फैटी एसिड्स से भरपूर होता है। इन एसेंशियल फैट्स को शरीर के लिए बहुत जरूरी माना जाता है। इन फैटी एसिड्स की ज्यादातर मात्रा शरीर भोजन से ही ग्रहण करता है। 

तिल भी गुणकारी हो सकते हैं 

तिल के बीजों में भी कई प्रकार के पोषक तत्व हो सकते हैं। इनमें से कुछ का सीधा संबंध हेयर ग्रोथ में सुधार से है। कुछ प्रकार के हेयर लॉस और बालों में पतलेपन की समस्या तभी होती है जब आप सही मात्रा में पोषक तत्व नहीं ले रहे होते हैं। 

ऐसी स्थिति में शरीर में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती जाती है और इसका सबसे ज्यादा और लंबा असर बालों पर दिखता है। बाल पहले से ज्यादा पतले होते जाते हैं और उनके बढ़ने की रफ्तार भी काफी कम हो जाती है। 

तिल में पाए जाने वाले पोषक तत्व आसानी से बालों में होने वाले इस नुकसान की भरपाई कर सकते हैं। तिल में विटामिन बी-1, कैल्शियम, कॉपर, फॉस्फोरस, आयरन, मैग्नीशियम, मैंग्नीज, जिंक, आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं। 

ड्राई हेयर 

तिल के तेल को बेहतरीन एमोलिएंट माना जाता है। एमोलिएंट से मतलब यह है कि ये आपकी स्किन और बालों को मुलायम और चिकना बनाने में मदद कर सकता है। इसमें पाए जाने वाले फैटी एसिड्स सेवन करने पर शरीर को फायदा पहुंचाते हैं। लेकिन अगर इसे ड्राई स्किन या स्कैल्प पर लगाया जाए तो भी ये बहुत अच्छा काम करता है। पामिटिक एसिड,लिनोलिक एसिड, लिनोलेनिक एसिड, ओलेइक एसिड, स्टियरिक एसिड आदि प्रमुख हैं। 

स्कैल्प की सेहत 

तिल के तेल में पाए जाने वाले फैटी एसिड्स इसे स्किन की गहराई तक ले जाने में मदद करते हैं। स्कैल्प में होने व वाली जलन या खुजली  खुजली की समस्या के कारण बालों के जड़ से टूटने या पैच में पज्ज्तले होने की समस्या हो सकती है। 

फैटी एसिड्स स्कैल्प और जड़ों को न सिर्फ हील करते हैं बल्कि राहत भी देते हैं। तिल का तेल लगाने से बालों में पतलेपन की समस्या, गंजेपन के छोटे पैच बनने की समस्या को दूर किया जा सकता है। 

तिल का तेल, स्किन में अन्य पोषक तत्वों को भी पहुंचाने में मदद कर सकता है। साल 2010 में चूहों पर की गई स्टडी में पाया गया कि तिल का तेल स्किन के अंदर ओजोन या ऑक्सीजन को पहुंचाने में मदद करता है। 

मनुष्यों में लगाने पर भी तिल का तेल इसी प्रकार का प्रभाव देता है। इससे स्किन में कट्स या खरोंच की रिकवरी होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। 

डैंड्रफ / रूसी 

तिल के बीज और तिल के तेल में एंटीबैक्टीरियल और एंटीफंगल गुण पाए जाते हैं। इन गुणों के कारण ये स्कैल्प में स्किन के सामान्य संक्रमण या इंफेक्शन की रोकथाम और उपचार में मदद कर सकता है। 

बालों में तिल का तेल नियमित रूप से लगाने पर ये डैंड्रफ को कम कर सकता है। ये डैंड्रफ भी खासतौर पर किसी फंगस या बैक्टीरिया से हुआ हो तो ये और ज्यादा कारगर हो सकता है। 

तिल के तेल में कुछ खास तरह की नमी देने वाले गुण भी पाए जाते हैं। 


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