पाक पर निर्णायक प्रहार जरूरी

पकिस्तान को एक बार फिर हमारी सेना ने करारा जबाब दिया है, 'एक मारोगे तो दो मारेंगे' की नीति अपनाते हुए सेना ने उसके लगभग दर्जन भर सैनिक जहन्नुम रसीद ही नहीं कर दिये, बल्कि उसके कई लाँचिंग पैड, बंकर व तेल डिपो भी तबाह कर दिया. हमारी ही कोख से नाजायज रूप से जन्म लेकर आज तक लगभग सात दशक का समय बीत चुका है. इस दौरान उसने जब-जब नजर टेढ़ी की है बुरी तरह पिटा है. इसलिए उसने आतंक निर्यात करने का नायाब तरीका ढूंढ़ कर छद्म युद्ध का सहारा लिया. उस पर मोदी युग में उसकी मुश्के बांधे जाने के बाद और दो-दो सर्जिकल स्ट्राइक के बाद उसकी घिग्घी बंद हो गयी थी. उसे जिस तरह रात दिन हमारे द्वारा हमला करने के स्वप्न आने लगे थे उससे लगा था कि अब उसकी रीति-नीति में कोई सुधार आयेगा, लेकिन जैसा की प्रधानमंत्री ने बहुत पहले ही कहा था कि पाकिस्तान जैसा देश एक-दो सर्जिकल स्ट्राइक से नहीं सुधरने वाला, तो वही हकीकत में हो रहा है. हमारी सेना द्वारा बताया गया है कि उसने गत एक साल में 4000 बार सीज फायर का उल्लंघन करने का दुस्साहस किया है, जिसका उसे करारा जबाब मिला है. उसके सैनिक और घुसपेठिये काफी तादाद में मारे गये है, लेकिन नुकसान हमारा भी हुआ है जिसमें हमारे भी सैनिक शहीद हो रहे है, भले ही वह पाकिस्तान की तुलना में काफी कम है. यदा-कदा निर्दोष नागरिक भी अपनी जान गवां रहे है. सीमा के आस-पास के लोग हमेशा पाक की इन दुस्साहसिक कुचेष्टाओं की दहशत में जीने को बाध्य है. सेना रोज जम्मू-काश्मीर में आतंकियों को चुन-चुन कर ठिकाने लगा रही है, काफी तादाद में असलहा बरामद कर रही है, सामरिक व कूटनीतिक स्तर पर इतनी खराब हालत होने के बावजूद और आंतरिक रूप से भी अस्त व्यस्त स्थिति में होने के बावजूद पाक अपनी नापाक हरकत बंद नहीं कर रहा है. वह लगातार हमें अकारण उकसाने में लगा रहता है. जैसा की हमारे देश में पुरानी कहावत है कि 'लातों के भूत बातों से नहीं मानते' वाला तरीका अपनाना होगा. कब तक हम जम्मू-काश्मीर में व पीओके में उसके खेल और ज्यादतियों को झेलते रहेंगे? कब हमारी सीमाओं पर लोग अमन चैन की नींद सो सकेंगे? और उन्हें यह भय नहीं होगा कि पाक की ओर से कब गोला-बारूद पड़ने लगेंगे, कब तक हमारे जवानों की शहादत होती रहेगी और निर्दोष अपनी जान गवांते रहेंगे. जब हम चीन को ठीक कर सकते हैं और उसे पीछे जाने को मजबूर कर सकते है, तो उसकी कठपुतली पाक की क्या बिसात है कि वह हमसे लगातार दुस्साहस करने की हिमाकत करता रहे. एक बार उसे इस तरह ठीक किया जाय की वह पीओके का नाजायज कब्जा छोड़ दे, और हमेशा-हमेशा के लिए हमसे मुंह लगना बंद कर दे. माना कि चीन की पाकिस्तान को शह है, तो अभी हाल में एक दौर ऐसा था जब ये दोनों साथ थे और नेपाल भी इनकी ही राह पर जा रहा था, तब भी हम चीन को लेकर टस से मस नहीं हुए. आज नेपाल को भी अपनी गलती का एहसास हो रहा है और चीन को भी. दोनों से रिश्तों में सकारात्मक प्रगति है. अभी भी हमारी उनके क्रिया-कलापों पर तीखी नजर है. सरकार का कड़ा रुख इस बात का द्योतक है कि अब पाक को भी लेकर कुछ सोचा जा रहा है, और कुछ ऐसा होगा जो उसकी नापाक हरकतों पर हमेशा हमेशा के लिए लगाम का कारण बनेगा. कारण उसकी नादानियां बंद नहीं हो रही है, जिसका आभास भारत सरकार को है. वे जानते है कि जिस पाकिस्तान को आज दुनिया आतंकी देश मानती है, जो दुनिया से अलग-थलग है, आर्थिक रूप से दिवालिया होने की कगार पर है और सामरिक रूप से हमसे रोज पिट रहा है. बावजूद इन सबसे उसका खूनी खेल बंद नहीं हो रहा है, जो जग जाहिर है. उसकी चमड़ी काफी मोटी है और मोटी चमड़ी को भेदने के लिए काफी मजबूत प्रहार की जरूरत होती है तभी उस पर असर होता है. अब पकिस्तान पर भी निर्णायक और सशक्त प्रहार जरूरी है तभी बात बनेगी.

 

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