आर्मी चीफ के नेपाल दौरे से फिर पटरी पर लौटेगा रिश्ता?


नई दिल्ली

काठमांडू के साथ 45 दिन तक चली 'बैक चैनल डिप्लोमैसी' की परीक्षा इस सप्ताह उस समय होगी, जब सेना प्रमुख मनोज मुकुंद नरवणे नेपाल में प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली से मुलाकात करेंगे और तिब्बत में मानसरोवर यात्रा के लिए लिपुलेख होते हुए सड़क निर्माण से शुरू हुए विवाद को दफनाने की कोशिश करेंगे। इस दौरान जनरल नरवणे को राष्ट्रपति विद्या देवी भंडारी नेपाल सेना प्रमुख की मानद उपाधि देंगी। भारतीय सेना प्रमुख का तीन दिवसीय नेपाल दौरा 4 नवंबर को शुरू होने जा रहा है। अलंकरण समारोह के बाद पीएम ओली रक्षा मंत्री की हैसियत से आर्मी चीफ से मुलाकात करेंगे। इस बात के कई संकेत मिल रहे हैं कि जनरल नरवणे का काठमांडू में रेड कार्पेट से स्वागत होगा, क्योंकि ओली सरकार महाकाली नदी पर पंचेश्वर बहुउद्देश्यीय परियोजना के अलावा भारत के साथ कई दूसरे हाइड्रो-इलेक्ट्रिक प्रॉजेक्ट शुरू करना चाहती है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, पंचेश्वर ड्राफ्ट डीपीआर पर दोनों देशों की टेक्निकल टीमें चर्चा कर रही हैं और 80 फीसदी मुद्दे आपसी विचार-विर्मश से सुलझाए जा चुके हैं। भारत की एसजेवीएन 900 मेगावाट का अरुण-3 प्रॉजेक्ट का निर्माण कर रही है और जीएमआर की ओर से 900 मेगावाट का करनाली हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट भी आगे बढ़ रहा है। भारत मानता है कि कालापानी नक्शा विवाद नेपाल की घरेलू राजनीति का परिणाम है और इसलिए काठमांडू से दोस्ती का हाथ मिलाना चाहता है। दो करीबी पड़ोसियों के बीच सदियों पुराने संबंधों को बहाल करने के लिए आंतरिक तकरार से ऊपर उठना होगा।


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