कैमूर में छठ को लेकर शुरू हुई घाट बनाने की तैयारी

कैमूर

प्रकाश के देवता सूर्य को भारतीय जनमानस में समृद्धि के साथ साथ यश के देवता के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त है। यही कारण है कि बिहार के औरंगाबाद जिले के देव में जहां ऐतिहासिक सूर्य मंदिर स्थित है वहां छठे व्रत की शुरुआत हुई और देखते ही देखते संपूर्ण उत्तर भारत में एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में प्रसिद्धि प्राप्त किया। जिसमें स्त्री-पुरुष दोनों कार्तिक महीने के शुक्ल पक्ष की षष्ठी को संध्या काल और सप्तमी को प्रात: काल सूर्य को अर्ध्य देकर पूजन के साथ इस कठिन व्रत की पूर्णाहूति करते हैं। ऐसी मान्यता है कि छठ व्रत धारण करने से प्रसिद्धि व समृद्धि के साथ साथ यश को प्राप्त करने वाली हर कोई मनौती पूर्ण होती है। हिन्दू धर्म के इस पवित्र व्रत की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि छठ व्रत से 15 दिन पूर्व ही नारियल, सेव, नारंगी, केला, ईख महावर इत्यादि फल व पूजा सामग्री से रामगढ़ बाजार पट जाता है। इस अवसर पर दुकानदार अपनी दुकानों को आकर्षक तरीके से सजाते हैं तथा छठ व्रत के लोकप्रिय गीतों के कैसेट बजाते हैं। जिससे एक अविस्मरणीय समा बंध जाता है।

महत्वपूर्ण घाटों की साफ सफाई तथा सुरक्षा व्यवस्था को लेकर स्थानीय प्रशासनिक अधिकारी अपनी कमर कसकर अपने कर्तव्यों को अमलीजामा पहनाने में जुट जाते हैं। लेकिन इस वर्ष अधिकारियों की उदासीनता से छठ व्रत धारियों में निराशा का भाव देखा जा रहा है।

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