स्वदेशी और सावधानी का नारा बुलंद करे

 पुरे देश में कोरोना महामारी को लेकर राहत भरा माहौल है, देश में कुछ दिनों से संक्रमितों का आंकड़ा छह लाख से नीचे है. सुधार का आंकड़ा भी नब्बे प्रतिशत से ज्यादा है मृत्यु दर भी काफी कम हुई है, यह सब आशादायी और सकारातमक संकेत हैं, लेकिन उसके साथ यह भी उतना ही सच है कि कोरोना अभी गया नहीं है. अभी भी उसे लेकर अपनाई जा रही सावधानियों को उतनी ही सिद्दत से अपनाना है जैसा हम आज तक करते आये है. ऐसे में दीपावली का त्यौहार सन्निकट है. स्वाभाविक है इस दौरान कोई ढिलाई न हो, इसे लेकर पूरे देश का प्रशासनिक तबका और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल चिंतित है. अब एक बार फिर हम सबकी परीक्षा की घड़ी है. देश ने मार्च से लेकर आज तक हर त्योहारों पर अभूतपूर्व और सराहनीय संयम का परिचय दिया है. हमने उन सारे बंधनों को मानते हुए और कोरोना से बचने के सभी मापदंडों का पालन करते हुए सारे त्यौहार मनाए है, उसी तरह इस त्यौहार को भी मनाएं, पूजा-पाठ करें लेकिन पटाखे बाजी जैसी बातों से परहेज करें. कारण पहले से ही दिल्ली जैसे कई महानगरों की आबोहावा जरूरत से ज्यादा खराब है. इस दौरान यदि अनियंत्रित पटाखेबाजी हुई, तो वह माहौल को और ख़राब करेगी, इसलिए जश्न मनाएं लेकिन यह ध्यान रखें कि वह जश्न मौत के जश्न में तब्दील न हो जाए और किसी का जश्न दूसरे के लिए जानलेवा न बन जाये. 'जान है तो जहाँन है' इस सूक्ति को हमें नहीं भूलना है. इसलिए पटाखेबंदी का इंतजार न करते हुए हम स्वयं संकल्प लें कि इस बार पटाखेबाजी बिलकुल नहीं करेंगे. यदि आपके पास धन है, तो उसे पटाखों में बर्बाद करने की बजाय उसका सदुपयोग करें और किसी अच्छे कार्यों में लगाएं. इस कोरोना काल में बहुत बड़ी तादाद में लोगों की रोजी-रोटी गयी है, और वे बड़ी परेशानी का सामना कर रहे है. यह धन उन जरुरत मंद लोगों के लिए लगायें, पूजा पाठ करें, दीप जालायें परंतु ऐसा कदापि न करें जो पहले से ही खराब हवा में और जहर घोले. लोग कोरोना से जूझ ही रहे है उन्हें और भी नयी शारीरिक बीमारियों का सामना न करना पड़े. क्योंकि अनुशासन और संयम के साथ माता लक्ष्मी की और भगवान् राम की पूजा- अर्चना और प्रार्थना ही हमें इस महामारी काल से उबारेगी, पटाखे नहीं. यह भी न भूलें की जब भगवान राम के वनवास से आने के बाद दीपावली मनाकर उनका स्वागत हुआ था तो पटाखा दागकर नहीं, बल्कि दीप जला कर. इसलिए इस भ्रम में नहीं रहना है कि पटाखा जलाना जरूरी है. साथ ही यह भी ध्यान रखना है कि हमें स्थानीय उत्पादों को ही वरीयता देना है. हमारा चिर दुश्मन चीन हमारे त्योहारों पर लगने वाले सामानों को बनाकर और उसे हमारे बजारों में पाटकर बड़ी कुशलता और चालाकी से मोटा मुनाफ़ा कामता आया है. अब हमें ऐसे तत्वों को मोटा नहीं करना है, हर हाल में हर सामान स्थानीय लोगों द्वारा निर्मित ही लेना है. चीन का सामान उसकी नीति की तरह ही घटिया है, हमी से कमाओ और हमी पर गुर्राओ वाली उसकी नीति आज देश के सामने उजागर है. मार्च से लेकर आजतक जारी हमारी आर्थिक, सामरिक और कूटनीतिक सर्जिकल स्ट्राइक से अब उसका गुर्राना मिमियाने में तब्दील हो रहा है. स्थानीय उत्पाद अपनाकर और चीन के उत्पादों का बहिष्कार कर, हम अपने उद्यमियों को, अपने कुटीर उद्योगों को संबल देंगे, और देश को मजबूत करेंगे और चीन जैसों को उनकी औकात दिखायेंगे. तो आइये स्वदेशी और सावधानी का नारा बुलंद करते हुए दीपावली मनाए और देश को दुनिया में हर दृष्टि से मिसाल बनाएं. 

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