नाबालिग के यौन शोषण पर मौत की सजा

Court Hammer

अबु धाबी

विदेशी निवेश और विशेषज्ञता के तौर पर संयुक्त अरब अमीरात को विकसित करने के लिए राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल नाहयान ने कई फैसलों का एलान किया है। इनमें से कुछ पर्सनल स्टेटस लॉ, फेडरल पीनल कोड और फेडरल पीनल प्रसीजरल कानून में बदलाव शामिल हैं। इनमें से कुछ का सीधा असर प्रवासियों पर होगा। गौरतलब है कि यूएई में बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं।

सहमति से बनाए गए शारीरिक संबंधों पर कानून कार्रवाई ऐसे केस में की जाएगी जब पीड़ित की उम्र 14 साल या उससे कम हो या उनकी कम उम्र हो, दिमागी हालत ठीक न हो या वे रिश्तेदार हों या पीड़ित के अभिभावक हो। नाबालिग या मानसिक रूप से विक्षिप्त इंसान के साथ जबरन शारीरिक संबंध बनाने पर मौत की सजा दी जाएगी।

प्रवासियों की वसीयत और जायदाद, शादी और तलाक, यौन प्रताड़ना जैसे 'सम्मान से जुड़े अपराधों' में बदलाव किए गए हैं। पर्सनल स्टेटस कोड और सिविल लॉ के संशोधनों से यूएई में रह रहे प्रवासियों को कानून चुनने की आजादी होगी जो उनकी पैतृक संपत्ति पर लागू होगा ताकि विदेशी निवेशकों के वित्तीय हितों को स्थिरता दी जा सके। पैतृक संपत्ति को लेकर मृतक व्यक्ति की नागरिकता के मुताबिक फैसला किया जाएगा। पर्सनल स्टेटस कोड के मुताबिक जिस देश में दो लोगों की शादी हुई होगी, वहां के नियम शादी के नियमों के मुताबिक होंगे न कि पति-पत्नी की नागरिकता के मुताबिक।

'ऑनर किलिंग' की सजा

1987 के पीनल कोड नंबर 3 के तहत राष्ट्रपति के फैसलों में बदलाव किए गए हैं। उस आर्टिकल को वापस ले लिया गया है जिसमें 'सम्मान के लिए किए गए अपराध' की सजा कम करने का प्रावधान था। नए संशोधन के तहत हर अपराध से हत्या और दूसरे कानूनी आर्टिकल्स की तरह निपटा जाएगा। इसके तहत महिलाओं के अधिकारों और कानून के पालन को सुनिश्चित किया जाएगा।


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