पुष्पम प्रिया चौधरी को नोटा से भी कम वोट मिले

पटना 

बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बांकीपुर विधानसभा सीट पर मतगणना पूरी हो गई है। यहां भाजपा के नितिन नबीन ने जीत दर्ज की। वहीं बदलाव की राजनीति की बात और इसके दावे करने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी इस सीट पर तीसरे नंबर पर रहीं और पूरी मतगणना के दौरान एक बार भी दौड़ में नहीं आ सकी। उन्हें करीब 1500 वोट ही मिल सके। भाजपा के नितिन नबीन ने इस सीट पर शत्रुघ्न सिन्हा के बेटे लव को भी मात दी। पुष्पम प्रिया इसके अलावा बिस्फी सीट से भी उम्मीदवार थीं। वहां भी वो हार रही हैं। उन्हें नोटा से भी ढाई गुना कम वोट मिले हैं। 

पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय स्तर पर लोगों का ध्यान आकर्षित किया था। लंदन रिटर्न पुष्पम को बिहार राजनीति की सनसनी भी कहा जा रहा था। एक समय में उनके पिता जेडीयू में थे, लेकिन इस चुनाव में पुष्पम अलग पार्टी बनाकर मैदान में उतरीं। पुष्पम प्रिया चौधरी ने प्लूरल्स पार्टी की स्थापना की। इसी पार्टी से खुद भी चुनाव लड़ीं और दूसरी सीटों पर भी प्रत्याशियों को मैदान में उतारा। पुष्पम की पार्टी ने अपने पहले चुनाव में साफ सुथरी छवि वाले सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षक, डॉक्टर और अन्य पेशेवरों को टिकट देने की कोशिश की। 

पुष्पम मार्च के बाद से बांकीपुर में गांवों का दौरा कर रही हैं और स्थानीय लोगों से मिली थीं। वह दावा कर रही थीं कि उनकी पार्टी को भारत के चुनाव आयोग से पंजीकृत किया गया है। 

बिहार चुनावों की सनसनी पुष्पम प्रिया जेडीयू के नेता और विधान परिषद के सदस्य रह चुके विनोद चौधरी की बेटी हैं। मूल रूप से दरभंगा की रहने वाली पुष्पम ने लंदन के मशहूर लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है। प्लूरल्स पार्टी की स्थापना करने वाली पुष्पम पार्टी की अध्यक्ष भी हैं। 


 बसपा की अंबिका ने जीत दर्ज की 

कैमूर जिले के रामगढ़ विधानसभा सीट क्रम संख्या 203 पर पहले चरण में मतदान हुआ था। यहां से बसपा की अंबिका सिंह ने जीत दर्ज कर ली है। उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी सुधाकर को 241 मतों के अंतर से हरा दिया है। अंबिका को कुल 57240 मत प्राप्त हुए हैं, जबकि दूसरे स्थान पर रहे सुधाकर को 56999 मत मिले हैं। 272405 मतदातावाले रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र से इस बार कुल 12 प्रत्याशियों की किस्मत दांव पर था. इस विधानसभा क्षेत्र का नेतृत्व छह बार कर चुके राजद के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की प्रतिष्ठा अपरोक्ष रूप से दांव पर लगी थी, क्योंकि उनके पुत्र सुधाकर सिंह उनके दल के टिकट पर मैदान में थे। उनका भाजपा का टिकट लेकर विधायक बने अशोक कुमार सिंह से मुकाबला पहले से माना जा रहा था। 

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