कोरोना काल में सादगी से हुई छठ पूजा

Chath pooja

मुंबई

सूर्योपासना का पर्व, छठ पूजा शुक्रवार की शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्ध्य देने के साथ मनाया गया। तीन दिन पहले 'नहाय खायके' साथ शुरू हुआ उत्तर भारत का यह पर्व महानगर में महापर्व के रूप में संक्षिप्त रूप से मनाया गया। कोरोना काल में जारी प्रतिबंधों की गाइड लाइन के साथ षष्ठी तिथि को डूबते सूर्य को दूध से अर्ध्य देने के साथ छठ व्रती शनिवार को उगते सूर्य (उदयाचलगामी) को अर्ध्य देकर इस व्रत का पारणा (समापन) करेंगे। मुंबई और उसके आस-पास के शहरों में रहने वाली छठ व्रती लाखों की संख्या में सूर्य को अर्ध्य देने के लिए जुहु के सागर तट पर जुटते थे, लेकिन इस वर्ष कोरोना के चलते घरों में छोटे ड्रमों में घुटने तक पानी के बीच अधिकांश श्रद्धालुओं ने अर्ध्य दिया।

इसके काफी संख्या में लोगों ने सुविधानुसार कृत्रिम तालाबों में आयोजित छठ महोत्सव में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए सूर्योपासना की।

मुंबई में रहने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के छठ व्रतियों के लिए छठ उत्सव महासंघ के तत्वावधान 1993 में पहली बार मुंबई के जुहु बीच पर छठ पूजा की शुरुआत की गई थी। धीरे-धीरे इसमें लाखों छठ व्रतियों की भीड़ उमड़ने लगी। इसकी लोकप्रियता देखते हुए 1998 में जुहु तट पर भोजपुरी कलाकारों को मंच पर उतार कर सांस्कृतिक कार्यक्रम के बीच छठ पूजा को राजनीतिक विस्तार दिया गया। लोगों को आकर्षित करने के लिए फिल्मी सितारों को आमंत्रित कर इसके स्वरूप को परिवर्तित कर दिया। समय के साथ उपनगरों में छठ पूजा को विस्तार मिला। जुहू के अलावा अन्य समुद्री तटों, नदियों, तालाबों पर छठ पूजा होने लगी।


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