फैसले में देरी पर सुप्रीम कोर्ट राज्यपाल से नाखुश

Supreme Court

नई दिल्ली

पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या में उम्रकैद की सजा काट रहे मुजरिम की सजा माफी की याचिका तामिलनाडु के राज्यपाल के पास दो साल से लंबित रहने पर सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी जाहिर की है। सुप्रीम कोर्ट ने जानना चाहा है कि क्या सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर राज्यपाल को इस मामले में फैसला लेने के लिए कह सकता है। याचिकाकर्ता एजी पेरारिवलन ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर यह मामला उठाया है। उम्रकैद की सजा काट रहे पेरारिवलन ने राज्यपाल के सामने अनुच्छेद 161 के तहत अर्जी दाखिल की है और सजा में माफी की गुहार लगा रखी है। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एल. नागेश्वर राव की अगुआई वाली बेंच ने पेरारिवलन के वकील की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि हम इस मामले में अभी अपने जूरिडिक्शन का इस्तेमाल नहीं करना चाहते हैं लेकिन हम इस बात से नाखुश हैं कि तामिलनाडु सरकार की सिफारिश दो साल से पेंडिंग है और मामला राज्यपाल के पास है। मामले की सुनवाई के दौरान पेरारिवलन के वकील गोपाल शंकर नारायणन से सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किया कि राज्यपाल मंत्रिपरिषद की सलाह पर काम करते हैं और अगर राज्यपाल आदेश पारित नहीं करें तो हमें बताएं कि अदालत का क्या जूरिडिक्शन बनता है।


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