'एक्टिंग में माफी की कोई गुंजाइश नहीं'


बॉलीवुड अभिनेता मनोज वाजपेयी का कहना है कि नवोदित कलाकारों को फिल्मोद्योग में आने से पहले उचित प्रशिक्षण लेना चाहिए, क्योंकि यह एक ऐसा पेशा है जिसमें माफी की गुंजाइश नहीं है और दूसरा मौका नहीं मिलता। अभिनेता ने कहा कि किसी भी अन्य पेशे की तरह अभिनय में भी लगातार अपने कौशल को निखारना होता है। वाजपेयी ने कहा, मैं सबसे कहता हूं कि जितना संभव हो, आपको कार्यशालाओं में जाना चाहिए, थियेटर करना चाहिए, अभ्यास करना चाहिए। अध्ययन करने के साथ ही दूसरों का अभिनय देखना चाहिए। उन्होंने कहा, यह ऐसा नहीं है कि आप चार छह महीने या एक साल में सीख जाएंगे, यह निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है। प्रशिक्षण के महत्व को रेखांकित करते हुए अभिनेता ने कहा कि फिल्म उद्योग में अस्तित्व बनाए रखने के लिए व्यक्ति को उसमें अच्छा होना चाहिए जो वह करना चाहते हैं। उन्होंने कहा, यह एक ऐसा पेशा है जिसमें माफी की गुंजाइश नहीं है, क्योंकि इतना सब कुछ दांव पर लगा होता है कि कोई आपको दूसरा मौका नहीं देना चाहता। आपको, उसमें अच्छा प्रदर्शन करना होता है जो आप करना चाहते हैं। वर्ष 1998 में 'सत्या' फिल्म में भीखू म्हात्रे का किरदार निभाने से चर्चा में आने वाले वाजपेयी ने बैरी जॉन के अभिनय स्टूडियो में प्रशिक्षण लिया था। उन्होंने 1994 में 'बैंडिट क्वीन' से फिल्मी कॅरियर की शुरुआत की थी और इससे पहले उन्होंने दिल्ली में थियेटर में अभिनय किया था।


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