कोरोना के विरुद्ध युद्ध का एलान

भारत तैयार... वैक्सीन का इंतजार

Modi

नई दिल्ली

देश में अभी कोरोना की वैक्सीन आने में वक्त है और जब तक वैक्सीन न आ जाए, हिदायतें ही काम आएंगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी देश को ऐसी ही हिदायतें दी हैं। मंगलवार को वे बीते आठ महीने में नौवीं बार मुख्यमंत्रियों की बैठक ले रहे थे।

9 राज्यों के सीएम से करीब चार घंटे चली इस मीटिंग के बाद प्रधानमंत्री बोले- अभी यह तय नहीं है कि कोरोना वैक्सीन की एक डोज देनी होगी या दो। उसकी कीमत क्या होगी, यह भी तय नहीं है। अभी ऐसे किसी भी सवाल का जवाब हमारे पास नहीं हैं।

हालांकि, प्रधानमंत्री ने वैक्सीन आने के बाद की बात जरूर की। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बारे में तो वैज्ञानिक ही बताएंगे, लेकिन हमें वैक्सीन आने के बाद की तैयारी अभी से करनी होगी। यानी उसका स्टोरेज और डिस्ट्रीब्यूशन।

9 राज्यों के सीएम शामिल हुए

मीटिंग में दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल, राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत, बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे, छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल, गुजरात के सीएम विजय रूपाणी, हरियाणा के सीएम मनोहर लाल खट्टर, केरल के सीएम पिनाराई विजयन और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शामिल हुए। महाराष्ट्र, दिल्ली, राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात उन राज्यों में शामिल हैं, जहां एक्टिव केस तेजी से बढ़ रहे हैं।

मोदी ने कहा- वैक्सीन की रिसर्च आखिरी दौर में पहुंची है। भारत जो भी वैक्सीन देगा, वो वैज्ञानिक तौर पर खरी होगी। भारत सरकार हर डेवलपमेंट पर बारीकी से नजर रख रही है। वैज्ञानिक हैं, जो वैक्सीन बनाने वाले हैं। कॉरपोरेट वर्ल्ड का भी कंपटीशन है। हम इंडियन डेवलपर्स और दूसरे मैन्यूफैक्चर्स के साथ भी काम रहे हैं।

वैक्सीन डिस्ट्रीब्यूशन: प्रधानमंत्री ने बताया कि वैक्सीन आने के बाद यही प्राथमिकता हो कि सभी तक पहुंचे। अभियान बड़ा होगा और लंबा चलने वाला है। हमें एकजुट होकर एक टीम के रूप में काम करना ही पड़ेगा। वैक्सीन को लेकर भारत के पास जैसा अनुभव है, वो बड़े-बड़े देशों को नहीं।

वैक्सीन पर राजनीति

मोदी ने मीटिंग के दौरान यह भी कहा, 'कुछ लोग वैक्सीन को लेकर राजनीति कर रहे हैं।

कोरोना से लड़ाई पर: उन्होंने कहा कि एक समय था कि अनजान ताकत से लड़ने की चुनौती थी। देश के संगठित प्रयासों से इसका सामना किया गया। नुकसान कम से कम रखा गया। रिकवरी और फैटलटी रेट के मामले में भारत संभली हुई स्थिति में है। टेस्टिंग और ट्रीटमेंट का बहुत बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है। टेस्टिंग का दायरा बढ़ाना है। फैटेलिटी रेट एक फीसदी और पॉजिटिविटी रेट पांच फीसदी के दायरे में रखना है।

कोरोना काल में लोगों के व्यवहार पर: प्रधानमंत्री ने बताया कि कोरोना के दौरान भारत के लोगों का व्यवहार भी अलग-अलग चरणों में अलग-अलग रहा है।


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