देश को मिली 'आसमानी आंख'

Sattelite  launcher

श्रीहरिकोटा

भारत के नवीनतम भू-पर्यवेक्षण उपग्रह ईओएस-01 और अन्य देशों के नौ अन्य उपग्रहों को पीएसएलवी-सी49 ने शनिवार को यहां से प्रक्षेपण के बाद सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित कर दिया है। ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (पीएसएलवी-सी49/ईओएस-01) ने 26 घंटों की उल्टी गिनती के बाद अपराह्न तीन बजकर 12 मिनट पर यहां सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरी। इसरो ने कहा कि प्रक्षेपण का समय पहले 3 बजकर 02 मिनट तय किया गया था, लेकिन यान के मार्ग में मलबा होने की वजह से इसमें 10 मिनट की देरी की गई। यह इस साल भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) का पहला मिशन है।  PSLV-C49/EOS- 01  मिशन को सफलतापूर्वक लांच किए जाने पर पीएम नरेंद्र मोदी ने इसरो और भारतीय स्पेस इंडस्ट्री को बधाई दी है। पीएम ने कहा कि समय पर मिशन को अंजाम देने के लिए कोविड-19 के दौर में हमारे वैज्ञानिकों ने कई बाधाओं को पार किया।

इसरो ने कहा कि ईओएस-01 से कृषि, वानिकी और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी। ग्राहकों की बात करें तो इनमें लिथुआनिया (1), लक्जमबर्ग (4) और अमेरिका (चार) के उपग्रह शामिल थे। इसरो चीफ के सिवन ने कहा, ''महामारी के दौरान टीम इसरो ने कोविड गाइडलाइन के मुताबिक काम किया, गुणवत्ता से समझौता किए बिना। सभी इसरो कर्मचारियों का इस समय गुणवत्तापूर्ण काम वास्तव में प्रशंसनीय है।'' उन्होंने आगे कहा, ''इसरो के लिए यह मिशन बहुत खास और अलग है। स्पेस एक्टिविटी 'वर्क फ्रॉम होम' से नहीं हो सकती है। हर एक इजीनियर को लैब में मौजूद होना होता है। इस तरह के मिशन में सभी तकनीशियन और कर्मचारी को साथ काम करना होता है।''


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