सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित मामलों से सुको नाराज

Supreme court

नई दिल्ली

सांसदों-विधायकों के खिलाफ देशभर की अदालतों में काफी समय से लंबित मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नाखुशी व्यक्त की। जस्टिस एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह असंतोष तब व्यक्त किया जब कलकत्ता हाई कोर्ट की ओर से पेश अधिवक्ता ने बताया कि बंगाल में एक पूर्व विधायक के खिलाफ 35 से भी अधिक वर्षों से एक मामला लंबित है। शीर्ष अदालत भाजपा नेता और अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इसमें उन्होंने वर्तमान और पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की तेजी से सुनवाई और विशेष अदालतें गठित किए जाने का आदेश देने की मांग की है। इससे पहले सितंबर में सुप्रीम कोर्ट ने वर्तमान एवं पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की सुनवाई के लिए देशभर में सभी हाई कोर्टों के मुख्य न्यायाधीशों से पीठों की अध्यक्षता करने के लिए कहा था। यह आदेश तब दिया गया था जब सुप्रीम कोर्ट को बताया गया कि देशभर की अदालतों में वर्तमान एवं पूर्व सांसदों-विधायकों के खिलाफ 4,400 से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित हैं। याद दिला दें कि सांसदों-विधायकों के खिलाफ काफी समय से लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी लाने और उन्हें निपटाने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने 14 दिसंबर, 2017 को देशभर में विशेष अदालतें गठित करने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को उस याचिका का निपटारा कर दिया जिसमें मध्य प्रदेश के कुछ कांग्रेस विधायकों के खिलाफ अयोग्यता कार्यवाही लंबित रहने का मुद्दा उठाया गया था। ये विधायक भाजपा में शामिल हो गए थे।


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