एक और डिजिटल स्ट्राइक

ड्रेगन अपनी कुत्सित चालों से बाज नहीं आ रहा है. अब तक हमारे और उसके बीच आठ बार बात हो चुकी है और हमेशा यही होता है कि ड्रैगन पीछे जाने को तैयार है, लेकिन उसके बाद फिर उसकी पुरानी वही टालमटोल वाली नीति समाने आ जाती है, जिस दोगली नीति का वह सिद्धहस्त खिलाड़ी है. लेकिन उसे यह पता नहीं की इस बार उसका मुकाबला नरेन्द्र मोदी से है, जो उसकी डाल-डाल चलनेवाली नीति का मुकाबला करके के लिए पात-पात चलने वाली नीति जानते है. इस बार की तीसरी डिजिटल स्ट्राइक जिस पर एक बार फिर चीन के 43 एप्स पर पाबंदी लगी है. चीन को साफ़ इशारा है कि अब भी सुधर जाओ और जो हमारे इलाके में अनाधिकार घुसपैठ किये हो वहां से वापस जाओ नहीं तो तुम्हारा भला नहीं होगा. यह अनायास ही नहीं है कि सेना ने लद्दाख में कड़ाके की ठंड में भी मोर्चे पर डटे रहने के लिए सारे साजो-सामन जुटा लिया है. मतलब साफ़ है कि जब तक चीन मार्च-अपै्रल की स्थिति तक वापस नहीं जाता, तब तक उस पर हमारी पैनी नजर रहने वाली है. उसे घेरने का व उसे आर्थिक रूप से भी घायल करने का कोई मौक़ा हम नहीं छोड़ने वाले. स्वाभाविक है कि इस अधुनिकतम डिजिटल स्ट्राइक पर तीखी प्रतिक्रया चीन द्वारा व्यक्त की जा रही है, हम तो यही चाहते है कि चीन को दर्द हो. जब उसे दर्द होगा तभी वह राह पर आयेगा और हमारे इलाके से वापस जायेगा. आज जिस तरह की उसकी घेराबंदी उसके चारो ओर है, ड्रैगन को इसका पूरा एहसास नहीं हो रहा है. हम उस पर अपनी सामरिक आक्रामकता, कूटनीतिक घेराबंदी और आर्थिक डिजिटल प्रहारों से उसे चेता रहे हैं कि अभी भी वह राह पर आए और हमारे इलाके से चुपचाप जैसे आया था वैसे ही चला जाए, नहीं तो नए युग का भारत तुम्हें बड़े ही बेआबरू तरीके से जाने को मजबूर करेगा. देश के प्रधानमंत्री तो यह बार-बार कह चुके है और कह रहे है कि भारत अपनी एक-एक इंच जमीन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उसके लिए जो भी जरूरी है सभी कदम उठाएगा.

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