राज्य में महिलाएं, बच्चे-बुजुर्ग सुरक्षित नहीं: विजया रहाटकर


भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वर्तमान राष्ट्रीय सचिव विजया रहाटकर का कहना है कि राज्य में लगातार महिलाओं पर अत्याचार बढ़ रहे हैं, लेकिन सरकार कुछ भी ठोस कदम नहीं उठा रही है। राज्य की कानून-व्यवस्था ठीक नहीं है, राज्य में कई महीनों से महिला आयोग अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा हुआ है, लेकिन सरकार इस दिशा में भी कुछ नहीं कर रही है। लगता है कि सरकार में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। शिवसेना अब पहले वाली शिवसेना नहीं रही है, अब वह कांग्रेस और राकांपा की सेना हो गई। उनका कहना है कि यह सरकार अपने अंतर्विरोध के कारण ही गिरेगी। कोरोना काल और बाढ़ के दौरान विपक्ष नेता देवेंद्र फड़नवीस ने सराहनीय कार्य किया है। प्रस्तुत है ऐसे ही अनेक मुद्दों को लेकर हुई बातचीत के कुछ अंश।

राज्य में महिलाओं पर अत्याचार की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, इसको लेकर आप क्या कहेंगी?

देखिये, हमारा देश महिलाओं का सम्मान करने वाला देश है, लेकिन कुछ चुनिंदे लोग हैं, जो महिलाओं को तकलीफ देने का काम कर रहे है। राज्य में महिलाओं के साथ जो घटनाएं घट रही हैं, उन पर नियंत्रण करना राज्य सरकार का काम है, लेकिन मौजूदा सरकार इस पर कुछ नहीं कर रही है। घटनाएं घटने में सरकार का दोष नहीं होता, लेकिन दोषियों के खिलाफ कारवाई और महिलाओं के साथ अन्याय करने वालों को सबक सिखाने का काम सरकार और पुलिस का होता है। कानून के तहत जिस प्रकार राज्य सरकार को कार्य करना चाहिए, वैसा नहीं हो रहा है। हर रोज महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार के मामले सामने आ रहे हैं, जिसमें बलात्कार, छेड़छाड़ आदि का समावेश है। कोविड केंद्रों में जिस प्रकार से महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार किया गया, वह राज्य सरकार के लिए शर्मशार करने वाली बात है। सरकार को और गंभीर होने की जरूरत है। राज्य में ही नहीं और देश भर में अनेक ऐसी बड़ी संस्थाए हैं, जो महिलाओं को सरंक्षण देने का काम करती है, उनको और सक्षम बनाने की आवश्यकता है। यहां तो संस्थाएं को सक्षम बनाना तो दूर की बात है, उन्हें संरक्षण भी नहीं दिया जा रहा है। मुझे महिला आयोग पद से इस्तीफा दिए सात से आठ महीने हो गए हैं, लेकिन अभी तक महिला आयोग अध्यक्ष का पद रिक्त पड़ा हुआ है। इसके साथ ही आयोग में जो महिलाएं सदस्य के रूप में काम कर रही थी, उनका भी इस्तीफा ले लिया गया है, जो राज्य सरकार के अधिकार में नहीं आता है। कोरोना काल के दौरान महिला आयोग की अधिक काम करने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा नहीं किया जा सका। हमारे कार्यकाल के दौरान महिलाओं के साथ गलत व्यवहार होने के बाद 24 घंटे के भीतर शिकायत दर्ज कर चार्जशीट दाखिल करना जरुरी था, लेकिन इस सरकार में ऐसा नहीं हो रहा है। हमने महिलाओं के सुरक्षा को लेकर फ्री हेल्पलाइन शुरू की थी, जो मौजूदा समय में बंद है।

राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर आप क्या सोचती हैं ?

राज्य में कानून-व्यवस्था बिलकुल भी ठीक नहीं है। उदाहरण के तौर पर अहमदनगर की वह घटना है, जिसमें एक पुलिसवाला भक्षक बनकर महिला के साथ दुर्व्यहार करता है। सरकारें बदलती है, लेकिन प्रशासन को अपना कर्तव्य ईमानदारी से करते रहना चाहिए। राज्य में सरकार चलाने के साथ प्रशासन पर नियंत्रण रखने का काम मुख्यमंत्री और गृहमंत्री का होता है। सभी पुलिसकर्मी बुरे नहीं होते, लेकिन कुछ लोगों के कारण पूरा विभाग बदनाम होता है। कुल मिलाकर राज्य की कानून -व्यवस्था ठीक नहीं है। राज्य में महिलाओं, बच्चों के साथ बुजुर्ग भी सुरक्षित नहीं है।

भाजपा संगठन के बारे में क्या अनुभव रहा है ?

पार्टी का संगठन सही दिशा में चल रहा है। विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी भाजपा है, जिसके करीब 18 करोड़ से अधिक सक्रिय सदस्य हैं। यहां सभी को अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलता है। योग्यता के आधार पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी जाती है। केंद्र से लेकर राज्य तक सही हाथों में पार्टी की कमान है।

पार्टी के वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़कर जा रहे हैं, इसको लेकर आपकी क्या राय है ?

पूर्व मंत्री एकनाथ खड़से ने जो निर्णय लिया है, वह उनका अपना निर्णय है। हमें तो यह संदेहास्पद लगता है। हम लोगों ने कभी नहीं सोचा था कि खड़से जैसे वरिष्ठ लोग पार्टी छोड़कर जाएंगे। बहरहाल अब तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी है, इसलिए उस विषय पर अधिक बात करने की आवश्यकता नहीं समझती हूं। लेकिन इतना जरूर कहूंगी कि पार्टी ने उन्हें बहुत कुछ दिया है। भाजपा में व्यक्ति के आधार पर नहीं, विचार के आधार पर निर्णय लिए जाते हैं और नीति पर राजनीति चलती है। कार्यकर्ताओं के माध्यम से पार्टी आगे बढ़ती है। हमारे पास कार्यकर्ताओं का विशाल संगठन है, न की व्यक्तियों का, इसलिए स्वभाविक है कि पार्टी अच्छी चल रही है और आगे भी चलेगी।

क्या राज्य सरकार के कामों से भाजपा संतुष्ट है?

बिलकुल नहीं, सरकार सही ढंग से काम नहीं कर रही है। यदि कर रही होती, तो राज्य में कोरोना का विस्फोट नहीं होता। राज्य के मुखिया घर से बाहर नहीं निकल रहे हैं। कहावत भी है- यथा राजा तथा प्रजा। जिस प्रकार मुख्यमंत्री काम कर रहे हैं, उसी प्रकार उनके मंत्री भी घर से बाहर नहीं निकल रहे है। राज्य की सरकार में गिने-चुने ऐसे मंत्री हैं, जिन्होंने कोरोना काल के दौरान घर से बाहर निकलर काम किया है। जब मुख्यमंत्री ही घर पर बैठा हो तो मंत्री और प्रशासन कैसे काम करेगा, यह सोचने वाली बात है। एक तरफ महिलाओं के साथ अत्याचार हो रहा है तो दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन चुपचाप बैठी है लॉकडाउन के दौरान प्रवासी मजदूरों के लिए सरकार ने कुछ काम भी नहीं किया।

प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर क्या कहना चाहेंगी ?

लोगों को स्थिति को समझना चाहिए। प्याज की कीमतों की जो समस्या है, वो जल्द ही हल हो जाएगी। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार इससे निपटने के लिए विदेश से प्याज आयात करने जा रही है। बेमौसम की बरसात से फसलों को नुकसान हुआ है। जल्द ही स्थिति ठीक हो जाएगी।

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत मामले को लेकर आप क्या सोचती हैं ?

अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या का मामला बहुत आगे जा चुका है। मामले की एक नहीं बल्कि तीन -तीन केंद्रीय एजेंसियां जांच कर रही हैं, इसलिए इस पर अधिक बोलना ठीक नहीं है। एक बात जरुर है कि इस मामले को लेकर अगर राज्य सरकार ने गंभीरता से काम किया होता तो राज्य सरकार की इतनी फजीहत नहीं होती। बहरहाल जल्द ही सच्चाई सामने आएगी और दोषियों पर कार्रवाई की जाएगी।

विपक्ष का आरोप है कि भाजपा हर मुद्दों पर राजनीति करती है?

देखिये, राज्य की जनता से विश्वासघात करके सत्ता में आने के बाद अगर सरकार में जनता का काम नहीं हो रहा है तो क्या विपक्ष उसे नहीं उठाएगा। विपक्ष का काम है, सोते हुए सरकार को जगाना, जिसे हम विपक्ष के रूप में बखूबी से निभा रहे हैं। जब आरोपों में सरकार घिरती है तो शोर मचाती है कि विपक्ष राजनीति कर रहा है।

क्या भविष्य में कंगना रनौत को भाजपा विधान परिषद या राज्यसभा भेज सकती है ?

हमारे पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है, ऐसा कोई विषय भी नहीं है, न ही ऐसी कोई चर्चा है। भाजपा में कोई भी फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है, इसलिए इस विषय पर मेरा बोलना ठीक नहीं है।

क्या राज्य सरकार अपना कार्यकाल पूरा कर पाएगी?

केवल निहित स्वार्थ के लिए राज्य में महाविकास आघाड़ी की सरकार चल रही है, जब स्वार्थ टकराएगा, अपने आप विघटन होगा और अलग राह चल पड़ेंगे। विपक्ष को सरकार गिराने में कोई दिलचस्पी नहीं है, लेकिन सरकार में शामिल तीनो पार्टियों में अंतर्विरोध बहुत है। तीन अलग-अलग विचारधाराओं की पार्टिया सरकार में शामिल हैं, इसलिए हमेशा तीनों का मतभेद सामने आता रहता है। ऐसी सरकार चलना राज्य की जनता के लिए ठीक नहीं है। सत्ता के लिए साथ आने वाली पार्टिया सिर्फ सत्ता सुख के लिए ही काम करती हैं। राज्य में कोरोना के बाद बाढ़ की भयानक स्थिति है, लेकिन सरकार ने किसानों के लिए कुछ नहीं किया।

राज्य में कोरोना के साथ बाढ़ से निपटने में सरकार कितनी सफल रही ?

कोरोना काल के बाद राज्य में आई भारी बाढ़ में जहां मुख्यमंत्री और उनके मंत्री पीड़ित जिलों में मदद पहुंचाने के लिए गायब थे, वहीं विपक्ष नेता लगातार राज्य का दौरा कर रहे है। हालांकि बाद में उन्होंने दिखावा किया, जिसे जनता समझ गई है। विपक्ष के नेता के रूप में देवेंद्र फड़नवीस ने सराहनीय काम किया है। सरकार अपने दायित्व को भूल चुकी है।

चर्चा है कि शिवसेना उर्मिला मातोंडकर को विधान परिषद भेजने जा रही है, इसे किस रूप में देखती हैं?

अभिनेत्री उर्मिला मातोंडकर का शिवसेना से विधान परिषद जाने की चर्चा से ऐसा लग रहा है कि शिवसेना के पास नेता और कार्यकर्ता नहीं बचे है। मुख्यमंत्री बनने से पहले शिवसेना का मजबूत संगठन था, लेकिन मौजूदा समय में शिवसेना का संगठन छिन्न भिन्न लगता है। शिवसेना की कुछ तो मज़बूरी होगी, जो कांग्रेस से चुनाव लड़ने वाली उर्मिला को विधान परिषद भेजना पड़ रहा है। उर्मिला को लेकर जो चर्चा चल रही है, अगर उसमें सच्चाई है तो यह शिवसैनिकों के साथ अन्याय होगा। शिवसेना पर आरोप लग रहा है कि वह अब पहले वाली शिवसेना नहीं रही, अब कांग्रेस और राकांपा की सेना हो गई है, इससे तो यही साबित होगा।


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