अर्नब गोस्वामी को हाईकोर्ट से जमानत नहीं

अभी रहना होगा जेल में

Arnab Goswamy

मुंबई

रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्नब गोस्वामी को बॉम्बे हाईकोर्ट ने अंतरिम जमानत देने से इंकार कर दिया है। बॉम्बे हाईकोर्ट ने गोस्वामी को अंतरिम जमानत के लिए निचली अदालत में जाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने भी कहा कि इस मामले में कोई ऐसी परिस्थिति उत्पन्न नहीं हुई है कि कोर्ट अपनी असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल करे। नियमित बेल की वैकल्पिक व्यवस्था याचिकाकर्ता के पास उपलब्ध है। बेंच ने कहा कि बेल के लिए आरोपी सेशंस कोर्ट में जा सकता है और संबंधित अदालत निर्धारित चार दिन की अवधि के भीतर इस पर फैसला करेगी। अदालत ने एक बार फिर कहा है कि जमानत के लिए पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट फिर सत्र न्यायालय में आवेदन करना होता है। जमानत न मिलने पर हाईकोर्ट में अर्जी दी जाती है। इस मामले में कोई अलग से व्यवस्था नहीं है। इसके साथ ही अदालत ने मामले में सह-आरोपी नीतीश शारदा और प्रवीन राजेश सिंह की अंतरिम जमानत अर्जी भी खारिज कर दी है। अदलात ने कहा है कि अभियुक्त सत्र न्यायालय का दरवाजा खटखटा सकते हैं और संबंधित अदालत निर्धारित समय सीमा (4 दिन) में आवेदन पर फैसला करेगी। अलिबाग सेशन्स कोर्ट ने पुलिस को अर्नब से जेल में 3 घंटे पूछताछ की परमिशन दे दी है। गौरतलब है कि पुलिस ने अर्नब कि कस्टडी के लिए सत्र न्यायालय से गुहार लगाई थी।

फोन के उपयोग का आरोप

रायगड़ डिस्ट्रिक्ट कोर्ट ने अर्नब को 18 नवंबर तक ज्यूडिशियल कस्टडी में भेज दिया था। इसके बाद उन्हें शनिवार रात तक अलीबाग के एक स्कूल में बने कोरेंटाइन सेंटर (अस्थाई जेल) में रखा गया। रविवार सुबह उन्हें तलोजा जेल में शिफ्ट कर दिया गया। पुलिस ने कहा था कि ज्यूडिशियल कस्टडी होने के बावजूद अर्नब मोबाइल फोन यूज कर रहे थे और सोशल मीडिया पर एक्टिव थे।

'टॉर्चर कर रही पुलिस'

अर्नब ने तलोजा जेल जाते वक्त कहा था कि उनकी जान को खतरा बताया। उन्हें वकील से बात नहीं करने दी जा रही। हिरासत में उन्हें टॉर्चर किया जा रहा है। इससे पहले शनिवार को अर्नब के वकील ने हाईकोर्ट में सप्लीमेंट्री एप्लिकेशन लगाई थी।


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