चीन को भारत की कड़ी चुनौती

 राजनाथ ने कहा- देश के स्वाभिमान और सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नही


नई दिल्ली 

चीन के साथ लगभग एक दर्जन वार्ता के बाद भारत-चीन रिश्तों में सार्वजनिक तल्खी तो थोड़ी घटी है, लेकिन शायद लद्दाख में जमी बर्फ पिघलनी शुरू नहीं हुई है। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने एक बार फिर से दोहराया है कि भारत किसी भी सूरत में युद्ध नहीं चाहता है लेकिन देश के स्वाभिमान और सुरक्षा को लेकर कोई समझौता भी नहीं करेगा। उन्होंने साफ साफ कहा कि भारत हमेशा से शांति के मार्ग पर चलता आया है और 'एक सीमा तक' आगे भी चलता रहेगा। केंद्रीय रक्षा मंत्री का यह बयान खासा अहम है, क्योंकि कुछ दिनों पहले यह खबरें आई थीं कि दोनों ओर से सेना की चरणबद्ध वापसी पर सहमति बन गई है। लेकिन उसके बाद से चुप्पी है। 

 पैंगोंग झील के पास मार्कोस कमांडो तैनात 

भारत और चीन के बीच जारी सीमा गतिरोध के बीच पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास भारतीय नौसेना के मार्कोस कमांडो बल को तैनात कर दिया है। नौसेना के विशेष मरीन कमांडो बल को मार्कोस कहा जाता है। यहां गतिरोध के पहले दिन से ही भारतीय वायुसेना के गरुड़ और भारतीय सेना के पैरा स्पेशल फोर्स के कमांडो डटे हुए हैं। 

झील में ऑपरेशन के लिए मिलेंगी नई नावें 

मरीन कमांडो की तैनाती का मकसद, तीन सेवाओं के एकीकरण को बढ़ाना और अत्यधिक ठंड के मौसम की स्थिति में नौसैनिक कमांडो को एक्सपोजर प्रदान करना है। सूत्रों ने कहा, 'मार्कोस को पैंगोंग झील क्षेत्र में तैनात किया गया है, जहां भारतीय और चीनी सेना इस साल अप्रैल-मई के बाद से संघर्ष की स्थिति में हैं।' उन्होंने कहा कि नौसेना के कमांडो भी जल्द ही झील में ऑपरेशन के लिए नई नावें मिलेंगी। 


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