सरकारी अस्पतालों में 'दर्द' बढ़ाएगी दवा

KEM Hospital

मुंबई 

राज्य और मनपा द्वारा संचालित सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई करने वाले 100 वितरकों ने 12 नवंबर की मध्य रात्रि से अपनी सेवा बंद कर दी है। कोरोना काल के दौरान सरकार की दवा खरीदी विभाग ने दवा वितरकों (एजेंसियों) के 220 करोड़ रुपए के बकाया बिल का भुगतान नहीं किया है जिसके कारण दवा वितरकों ने सरकारी अस्पतालों को 12 नवंबर की रात से दवा की आपूर्ति बंद कर दिया है। गौरतलब हो कि राज्य में सरकार द्वारा संचालित अस्पताल को 100 से अधिक दवा वितरक दवाओं की आपूर्ति करते है।  

 इन आपूर्तिकर्ताओं का आरोप है कि कोरोना काल जैसे गंभीर परिस्थिति में हमने सरकार को दवा आपूर्ति के साथ-साथ हर प्रकार की मदद की, लेकिन सरकार ने हमारा 220 करोड़ बाकी बिल को अभी तक नहीं दिया है। जिसके चलते सभी दवा वितरकों ने मजबूरन दवा आपूर्ति बंद करने और आने वाले समय में राज्य सरकार की किसी भी निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं लेने का भी निर्णय लिया है। वितरकों द्वारा बंद की गई दवा आपूर्ति के कारण आने वाले कुछ दिनों में राज्य के अस्पतालों में दवा का संकट होने की संभावना है। जिसका खामियाजा सामान्य जनता और मरीजों को उठाना पड़ सकता है। राज्य की ड्रग प्रोक्योरमेंट यूनिट ने राज्य के 100 दवा वितरकों से 220 करोड़ रुपये की दवाएं खरीदी थी। जिसका बिल भुगतान न करने के कारण दवा वितरकों ने दवा की आपूर्ति को बंद कर दिया है। उल्लेखनीय है कि राज्य के 19 अस्पतालों और 34 स्वास्थ्य केंद्रों में दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की आपूर्ति में कटौती करने का फैसला किया गया है।राज्य में 100 से अधिक वितरक ड्रग डीलरों द्वारा बुलाए गए 'ड्रग सप्लाई शटडाउन' आंदोलन में शामिल हो गए हैं। राज्य सरकार की निविदा प्रक्रिया में भाग नहीं लेने वाले दवा वितरकों के निर्णय से 215 सर्जिकल दवाओं, 81 सर्जिकल स्टेपलर और 194 सर्जिकल रस्सियो  और राज्य सरकार की दवा खरीद सेल से 100 से अधिक चिकित्सा उपकरणों की निविदा प्रक्रिया प्रभावित होगी। अस्पतालों को अब दवाओं को सीधे बाजार से खरीदना होगा। इस प्रतिबंध का का असर अस्पतालों में इलाज कराने आने वाले जरूरतमंद गरीब मरीजों पर पड़ने की संभावना है। बताया जाता है मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। उन्होंने संबंधित विभाग को वितरकों को तुरंत आवश्यक भुगतान करने को कहा है। अखिल खाद्य एवं औषधि लाइसेंस धारक संघ के अध्यक्ष ने बताया कि बकाया बिल को लेकर दवा वितरकों ने कई बार संबंधित अधिकारी से मुलाक़ात कर बिल भुगतान करने की मांग की लेकिन अधिकारियों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। 


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