152 किसानों के खाते में पहुंचे 68 लाख रुपये

वाराणसी। वाराणसी को अब एग्रीकल्चर एक्सपोर्ट व फूड प्रोसेसिंग के महत्वपूर्ण केंद्र में तब्दील किया जा रहा है, जिससे किसानों के चेहरे खिल उठे हैं। जल्द ही यहां पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पैक हाउस बनाए जाने की कवायद चल रही है। वाराणसी में एक ओर उत्पादों का निर्यात बढ़ा है वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूपी के उत्पादों को अधिक मूल्य मिल रहा है। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के जरिए किसानों के उत्पाद जैसे बनारसी लंगड़ा आम, काला चावल, हरी मिर्च अब विदेशों में निर्यात हो रहे हैं। एपीडा के क्षेत्रीय प्रभारी डॉ. सीबी सिंह ने बताया कि वाराणसी को एग्री एक्सपोर्ट सेंटर बनाने का प्रस्ताव एक नवंबर 2019 से क्रेता और विक्रेता मीट का आयोजन कर धरातल पर आया। इसमें चार  एफपीओ और फ्रेश वेजिटेबल  एंड फ्रूटस एक्सपोर्ट एसोसिएशन (वाफा) मुंबई के बीच में एक एमओयू साइन किया गया। परिणाम स्वरूप दुबई के लिए 14 मीट्रिक टन हरी मिर्च साल 2019 में निर्यात की गयी।

एपीडा ने पूर्वांचल के किसानों को एग्री एक्सपोर्ट से जुड़ी जानकारी देने के लिए साल 2020 में  वाराणसी ,चंदौली ,गाज़ीपुरमें ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाया। इससे पूर्वांचल में एग्री एक्सपोर्ट के प्रति लोगों में जागरूकता के साथ उत्पादन क्षमता भी बढ़ गई। वाराणसी से दिल्ली व लंदन को साल 2020 के अप्रैल माह में 3 मीट्रिक टन हरी मिर्च निर्यात की गई। कोरोना काल में मई माह में दुबई को तीन मीट्रिक टन फ्रेश लंगड़ा आम निर्यात किया गया। जून में लंदन को 1.2 मीट्रिक टन आम निर्यात किया गया। एपीडा के जरिए चंदौली जनपद  निर्यातकों ने जून 2020 में 80 मीट्रिक टन काला चावल लिया। जिससे 152 किसानों के खातों में 68 लाख रुपए सीधे तौर पर उनके खातों में  पंहुचे। 


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