टमाटर का भाव होलसेल में 30 पैसे किलो तो रिटेल में 30 रुपए किलो

Tomato

मुंबई

अनंतपुर और कुर्नूल के किसानों का दावा है कि उन्होंने टमाटर उगाने और कीटनाशक आदि पर प्रति एकड़ 30 हजार रुपए खर्च किए हैं। उन्हें मंडी तक टमाटर लाने के लिए किराया भी देना पड़ता है। इससे किसानों की लागत भी नहीं वसूल हो पा रही। आँध्र प्रदेश के किसानों के लिए यह एक बुरा दिन है। दो दिनों से यहां टमाटर की कीमतें 30 पैसे प्रति किलो पर आ गई हैं मंडी प्रबंधकों का कहना है कि अचानक मंडी में 150 टन टमाटर आ गया, जिसकी वजह से कीमतें काफी नीचे आ गयीं। इस सर्द जाड़े में दिल्ली में पिछले करीबन एक महीने से आंदोलन पर बैठे किसानों की मांग अगर पहले ही पूरी हो गई होती तो आज यह नौबत तो नहीं होती कि किसान को 30 पैसे किलो टमाटर बेचना पड़ता। जी हां, आँध्र प्रदेश के किसानों के लिए यह एक बुरा दिन है। दो दिनों से यहां टमाटर की कीमतें 30 पैसे प्रति किलो पर आ गई हैं। एक ऐसी रकम जो कि फिलहाल चलन में ही नहीं है।

टमाटर की बंपर पैदावार

आंध्र प्रदेश के किसानों के लिए टमाटर इसलिए बुरा दिन लाया है, क्योंकि टमाटर की बंपर पैदावार हुई है। इस पैदावार से टमाटर की कीमतें बहुत नीचे आ गई हैं। इससे किसानों का खासा नुकसान हो रहा है। आंध्र प्रदेश के रायलसीमा इलाके में टमाटर की थोक कीमतें घटकर 30 से 70 पैसे प्रति किलो तक पहुंच गयी हैं। इससे किसानों की हालत खराब है। उन्होंने स्थानीय मंडी अधिकारियों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया है। मंडी प्रबंधकों का कहना है कि गुरुवार को अचानक मंडी में 150 टन टमाटर आ गया, जिसकी वजह से कीमतें काफी नीचे आ गयीं।

टमाटर के लिए प्रसिद्ध है यह इलाका

 यहां का रायलसीमा इलाका टमाटर के लिए काफी प्रसिद्ध है। यहां का प्रसिद्ध बाजार पाथीकोंडा एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्केट कमिटी (APMC) में गुरुवार को टमाटर की थोक कीमतें 30 से 70 पैसे के बीच पहुंच गईं। यहां किसानों को एक किलो टमाटर का रेट 30-70 पैसे तक मिल रहा है। जबकि किसानों को यह टमाटर मंडी में लाने के लिए इससे ज्यादा किराया खर्च करना पड़ रहा है। इसको लेकर किसानों ने मंडी के अधिकारियों और प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन भी किया।

गुजारा होना मुश्किल है

किसानों का कहना है कि हमारी फसल इसी भाव पर बिकेगी तो गुजारा होना मुश्किल है। किसानों का कहना है कि टमाटर को पैदा करने में इससे कई गुना ज्यादा लागत लगती है। फिर उसमें मेहनत और मंडी तक लाना होता है। इसके लिए भी किराया लगता है। अगर मंडी में लाकर 30 पैसे ही किलो बेचना है तो इससे अच्छा कि हम न लाएं। हमारा किराया तो बच जाएगा। घाटा नहीं होगा। किसानों का कहना है कि ऐसी हालत में परिवार का खर्च कैसे निकलेगा? इस हालत के लिए मंडी के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए किसानों ने विरोध प्रदर्शन भी किया।


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