बिहार में कर्ज देने में 30 जिलों के बैंक पिछड़े

पटना

 सरकार के तमाम निर्देशों के बावजूद राज्य के साख-जमा अनुपात (सीडी रेशियो) में सुधार नहीं हो पा रहा है। वार्षिक साख योजना के लक्ष्य से भी बैंक काफी दूर हैं। बिहार के 30 जिले ऐसे हैं, जहां साख उपलब्धि औसत राज्य साख योजना की उपलब्धि से काफी कम है। अर्थात ये जिले लोगों को कर्ज देने के मामले में बहुत पीछे हैं। 74वीं राज्यस्तरीय बैंकर्स समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए उपमुख्यमंत्री सह वित्तमंत्री तारकिशोर प्रसाद ने कहा कि कोविड और चुनाव के चलते बैंक लक्ष्य से पिछड़ गये हैं। उन्होंने बैंकों को अगली तिमाही में हर हाल में अधूरे लक्ष्य पूरे करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने आत्मनिर्भर भारत के साथ ही आत्मनिर्भर बिहार की भी बात कही थी। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सात निश्चय पार्ट-2 की बात की है और सरकार के एजेंडे का यह प्रमुख हिस्सा भी है। आने वाले दिनों में सात निश्चय पार्ट-2 के जरिए आत्मनिर्भर बिहार बनाने का जो संकल्प है वो कैसे पूरा, इसके लिए हमें तैयार होना होगा। राज्य सरकार कौशल विकास एवं उद्यमिता विकास विभाग का सृजन करने जा रही है। 20 लाख रोजगार की जो बात सरकार ने की है वो सिर्फ सरकारी नौकरी ही नहीं है, स्वरोजगार सृजन भी उसमें शामिल है। स्वरोजगार सृजन में बैंकों की भूमिका काफी अहम है। राज्य में औसत राज्य साख योजना की इस साल सितंबर तिमाही तक उपलब्धि 33.39 प्रतिशत है। जबकि इस औसत प्रतिशत से भी कम उपलब्धि वाले छह जिलों में अरवल (18.39 प्रतिशत), बांका (19.32 प्रतिशत), मधुबनी (19.72 प्रतिशत), जहानाबाद (20.29 प्रतिशत), गोपालगंज (20.54 प्रतिशत) और सुपौल (20.54 प्रतिशत) शामिल हैं।


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