बदलाव की हकीकत से रूबरू हो गुपकार

जम्मू कश्मीर में हाल में संपन्न हुए डीडीसी चुनाव और वहां के सभी दलों के गुपकार गठबंधन और कांग्रेस तथा भाजपा के बीच सीधे मुकाबले में भाजपा का सबसे बड़ा दल बनना और राज्य में सर्वाधिक मत प्राप्त करना यह जताता है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 और 35ए हटाने के बाद जिस बदलाव की बयार की शुरूआत हुई थी, वह लगातार बलवती हो रही है और इस बदलाव की बयार को रोकने की गुपकार में शामिल दलों की कोशिश नाकाम हो चुकी है। कारण जिस तादाद में बदलाव के बाद हुए इस चुनाव में स्थानीय लोगों ने इस मतदान में हिस्सा लिया और जिस तरह शांति पूर्ण माहौल ने चुनाव सम्पन्न हुए, यह जाहिर करता है कि बदलाव का अभिनंदन आत्म केंद्रित और अपने को राज्य का चौधरी मानने वाले नेताओं को भले नहीं पच रहा है, राज्य की आवाम उसे स्वीकार कर चुकी है। आवाम, भ्रष्टाचारी और परिवारवादी राजनीित के दशकों की पकड़ से छूटने का जश्न मना रही है, जिस फैसले को जनता का समर्थन हो उसका विरोध करनेवालों को जनता ही उनकी असली जगह पर पुहंचा देती है। इसकी इस चुनाव में दुन्दुभी बजा चुकी है जैसे जैसे जनता को देश के मुख्या प्रवाह में आने का फायदा और दिखेगा वैसे-वैसे पीडीपी, एनसी जैसे दल कालावाह्य होते जायेंगे और एक दिन ऐसा आयेगा जब स्वतः तिमिर तिरोहित हो जाएंगे। चुनाव कराकर केंद्र सरकार ने एक बार पुनः साबित कर दिया है कि उसका इरादा वहां अनंत काल तक राष्ट्रपति शासन नहीं लगाए रखने का है। वह किस तरह पंचायत राज लाने और विकास का फल और फैसला करने का हक़ स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों को सुपुर्द करने के लिए तैयार है। डीडीसी चुनाव पहली बार होना ही इस बात का प्रमाण है की कैसे अब तक जनता को विकास के कामों में भागीदारी से दूर रखा गया था। बदलाव के बाद हो रहे कार्यों से जाहिर है कि किस तरह उसके पहले राज्य कुछ परिवारों द्वारा संचालित दलों की जागीर की तरह था। कैसे उनके सत्ता सीन रहते हुए राज्य में अलगाववाद पनपा, पाक प्रायोजित आतंकवाद का कहर टूटा और आम आदमी का जनजीवन तहस नहस हो गया। ये और इनका परिवार चैन की बंशी बजाते रहे। आतंकवाद, अलगाववाद का सामना करने को कौन कहे ये खुलेआम पाक परस्ती का प्रदर्शन करते रहे इन पर उक्त नकारात्मक तत्वों से साठगांठ और मिलीभगत के भी आरोप लगते रहे हैं। अब जम्मू-कश्मीर की जनता इन्हें यानी अब्दुला, मुफ्ती जैसे जागीरदारों को बखूबी समझ गयी है। इसलिए, इन्हें बदलाव को लेकर बौखलाहट भरे और देश विरोध की हद तक जाने वाले सारे विधान बंद कर देना चाहिए। आज जम्मू-कश्मीर की जनता को आयुष्मान भारत जैसी तमाम देशव्यापी जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिलने का मार्ग प्रशस्त हो गया है और कई योजानों का लाभ मिलना शुरू हो गया है। कई दशकों से मताधिकार से वंचित लोग इस बार मतदान कर पाए हैं और अतीत के इन जागीरदारों के काले कारनामे एक-एक कर उजागर हो रहे हैं, अब इन्हें पुराने दिन वापस आने के मुंगेरीलाल के हसीन सपने देखना बंद कर देना चाहिए। उससे इनका कुछ नहीं होना है न ही कुछ हासिल कर पायेंगे। कारण जनता इनकी हकीक़त से रूबरू हो चुकी है और जैसे-जैसी बदलाव का असर धरातल पर मजबूत होगा इनका बचा-खुचा आधार भी समाप्त होना है। इसलिए बेहतर होगा की अपनी हठधर्मिता का परित्याग कर ये देश और जम्मू-कश्मीर के जनमत के प्रवाह के मुताबिक़ अपने सपनों और क्रिया-कलापों में बदलाव लायें और उल्टे-सीधे विधान कर अपनी होश हवाश जाने का पुख्ता प्रमाण देना बंद करें। इससे उनकी परेशानी ही बढ़ेगी और उन्हें कानूनी अड़चनों का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए गुपकार, जन भावना को अपना मार्गदर्शक माने और दिल की नहीं दिमाग की सुने, सपने न देखे हकीकत से रूबरू हो। 


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