नदी शुद्धिकरण प्रोजेक्टमें कंपनियों की रुचि नहीं

Mithi River

मुंबई 

मुंबई में बहने वाली नदियों में गटर का पानी व कचरा न जाने पाए, इसके लिए मुंबई मनपा लंबे समयसे प्रयासरत है, लेकिन अभी तक बीएमसी को इसमें सफलता नहीं मिली है। बीएमसी द्वारा नदी शुद्धिकरण प्रोजेक्टके लिए निकाले गए टेंडर में अभी तक कंपनियों ने रुचि नहीं दिखाई है। इससे यह प्रोजेक्ट लटकता दिखाई दे रहा है, इसीलिए नदी शुद्धिकरण प्रोजेक्टके लिए बीएमसी ने टेंडर भरने की अवधि 29 दिसंबर तक बढ़ा दी है। बीएमसी का कहना है किटेंडर भरने के लिए यह आखिरी मौका दिया गया है, जो कंपनी टेंडर भरेगी, उसे प्रोजेक्टका ठेका दे दिया जाएगा। मुंबई में दहिसर, पोयसर, ओशिवरा जैसी नदियों में बड़े पैमाने पर आने वाले गंदे पानी को शुद्धकर नदी में छोड़ने की योजना है, जिससे नदियां साफ रहे। इसके लिए बीएमसी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है। जहां बाहर से आने वाले गंदे पानी को शुद्धकर नदी में छोड़ा जाएगा। इसके लिए बीएमसी ने टेंडर निकाला था। कुछ कंपनियों ने इसमें रुचि दिखाई, लेकिन टेंडर भरने के लिए बार- बार समयकी मांग करती रहीं। बीएमसी अबतक तीन से चार बार समयसीमा बढ़ा चुकी है, लेकिन अब बीएमसी ने 29 दिसंबर के बाद समयन बढ़ाने का निर्णय लिया है। बीएमसी के अतिरिक्तआयुक्त पी वेलारासू ने कहा किटेंडर भरने की समयसीमा अब नहीं बढ़ाई जाएगी। देखते हैं कौन टेंडर भरता है। उसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि पोयसर नदी के पानी के शुद्धिकरणके लिए 751 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तय किया गया है। इसी तरह ओशिवरा नदी के लिए 503 करोड़ रुपए का अनुमानित खर्चहै। साथही दहिसर नदी के लिए दो स्थानों पर सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना है। 

मीठी नदी का कामशुरू 

मीठी नदी के शुद्धिकरण करने का पहले चरणका काम शुरू हो गया है। मीठी नदी के दो किलोमीटर के दायरे का काम शुरू है। इससे नदी में आनेवाले गंदे पानी को रोका जाएगा। पिछले दिनों स्थायी समितिने मीठी नदी के चौड़ीकरण, गहराई व सुरक्षादीवार के लिए काम को मंजूरी दे थी। इस काम के लिए 500 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान है। 

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