देश में वैश्विक बाजार की दरकारः खोत

नए कृषि कानून के समर्थन में रयत क्रांति संघटना निकालेगी किसान आत्मनिर्भर यात्रा 

sadabhau Khot

मुंबई

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानून से किसानों का फायदा है, इसलिए किसानों का कानून का विरोध करना गलत है। सरकार को एक विश्व एक बाजार का नियम लागू करना चाहिए। यह विचार ओमेगा हाउस हीरानंदानी पवई स्थित हमारा महानगर कार्यालय में संदिच्छा भेंट देने आए रयत क्रांति संघटना के अध्यक्ष और पूर्व राज्यमंत्री सदाभाऊ खोत ने व्यक्त किया है। नए कृषि कानून की सराहना करते हुए खोत ने कहा कि 24 से 27 दिसंबर तक हमारी पार्टी ने कानून के समर्थन में किसान आत्मनिर्भर यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। यह कृषि कानून के समर्थन में देश की पहली यात्रा होगी। तीन दिवसीय इस यात्रा का शुभारंभ पूर्व मंत्री और भाजपा विधायक आशीष शेलार की उपस्थिति और क्रांति सिंह नाना पाटिल के गांव येडेमछिंद्र, तालुका वालवा जिला सांगली से की जाएगी। यात्रा का समापन राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और विधानसभा में नेता विपक्ष देवेंद्र फड़नवीस की उपस्थिति में 27 दिसंबर को इस्लामपुर में किया जाएगा। 


कृषि कानून किसानों के लिए फायदेमंद 

सदाभाऊ खोत ने आगे कहा कि देश में पहली बार कोई राजनीति पार्टी है, जो केंद्र सरकार द्वारा लागू नए कृषि कानून से समर्थन में यात्रा निकालने जा रही है। इस कानून से राज्य सहित पूरे देश के किसानों को फायदा है, लेकिन कुछ लोग अपने निजी स्वार्थ के लिए इस कानून का विरोध कर रहे है। इस कानून का विरोध करने वाले किसानों से अधिक फसल को बेचने वाले बिचौलिए है, क्योंकि इस नए कानून से हरियाणा और पंजाब के बिचौलियों का सबसे अधिक नुकसान हुआ है, इसलिए वे कानून का विरोध कर रहे है। खोत ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने कृषि कानून में संशोधन को लेकर शरद जोशी की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया था। उस समय की केंद्र सरकार के समय से कृषि कानून में संशोधन की चर्चा चल रही है। खोत ने कहा कि सरकार से हमारी मांग है कि वन नेशन वन मार्केट की तर्ज पर विश्व का बाजार एक होना चाहिए। एमएसपी पर उन्होंने कहा कि किसानों की मांग पर अगर सरकार एमएसपी को इस कानून लागू कर देती है तो इससे किसानों को बहुत नुकसान होगा, जो किसान समझ नहीं पा रह रहे। 

सिर्फ दो राज्यों का विरोध क्यों? 

उन्होंने सवाल उठाया कि नए कृषि कानून का विरोध सिर्फ दो राज्य हरियाणा और पंजाब के ही किसान क्यों कर रहे है। इसके पीछे कोई बड़ी राजनीति है। महाराष्ट्र में किसानों के फसल बिक्री को लेकर कोई दिक्क्त नहीं है, क्योंकि पूरे राज्य में 307 से अधिक कृषि मंडियां और 1100 से अधिक लाइसेंस धारक खरीदार जुड़े हैं। इसके साथ-साथ 3500 से अधिक एमपीओ है, जिनके माध्यम से किसान अपनी फसल को बेचने का काम करते है, इसलिए यहां के किसानों को कोई दिक्क्त नहीं आएगी। खोत से पूछे जाने पर कि किसान अपनी अनाज को सस्ते दरों पर बेचता है, लेकिन वहीं अनाज शहर में आकर महंगा क्यों हो जाता है, इसके जवाब में खोत ने कहा कि अगर ग्रामीण का किसान अपनी अनाज को शहर में आकर बेचता तो शहरी जनता को वो अनाज पहले की तुलना में सस्ता मिलता, लेकिन कुछ ऐसी किसान संघटना हैं, जो किसानों को शहर में अनाज बेचने का तीव्र विरोध करती है। इसमें भाजपा की भाजपा किसान मजदूर संघटना, कम्युनिस्ट, सीपीएम जैसे कई राजनीतिक पार्टियों की मजदूर संघटना हैं, जो किसानों को शहर के फसल बेचने का विरोध करती है इसलिए ग्रामीण की तुलना में शहर में अनाज महंगा बिकता है।


Labels:

Post a comment

[blogger]

MKRdezign

Contact form

Name

Email *

Message *

Powered by Blogger.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget