पंजाब के वकील ने खाया जहर


नई दिल्ली

नए कृषि कानूनों के विरोध में देशभर के किसान 32 दिन से दिल्ली बॉर्डर पर जमे हुए हैं। इस बीच पंजाब के एक वकील ने रविवार को दिल्ली के टीकरी बॉर्डर पर चल रहे आंदोलन वाली जगह से कुछ दूर जहर खाकर खुदकुशी कर ली। किसान आंदोलन के दौरान यह खुदकुशी का तीसरा मामला है। इससे पहले 16 दिसंबर को करनाल जिले के सिंघड़ा निवासी 65 साल के संत बाबा राम सिंह ने गोली मारकर खुदकुशी कर ली। वहीं, 20 दिसंबर को बठिंडा के रामपुरा फूल में गुरलाभ सिंह ने जहर खा लिया था। उनके घरवालों ने बताया था कि टीकरी बॉर्डर पर धरने से लौटने के बाद दो दिन से परेशान था। उसके आखिरी बोल थे, पता नहीं क्या होगा करोड़ों किसानों का।   

सिंघु बॉर्डर पहुंचे केजरीवाल

किसानों के समर्थन में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सिंघु बॉर्डर पहुंचे। उन्होंने कहा कि वे तीन नए कानून लेकर आए हैं। इन कानूनों के जरिए अब ये किसानों की खेती छीनना चाहते हैं। उनकी खेती भी उठाकर अपने दो से तीन बड़े-बड़े पूंजीपति दोस्तों को देना चाहते हैं। अगर किसान की खेती भी चली गई तो किसान कहां जाएगा। उन्होंने इन कानूनों पर बहस के लिए केंद्र सरकार को चुनौती दी। केजरीवाल ने कहा कि केंद्र सरकार कानूनों के फायदे के बारे में बात नहीं कर रही है। वे सभी कह रहे हैं कि इससे कोई नुकसान नहीं होगा। यह किसानों की जमीन या न्यूनतम समर्थन मूल्य नहीं छीन लेगा। क्या ये फायदे हैं? फिर आप कानून क्यों लाए हैं? इन्हें फाड़कर फेंक देना चाहिए।

किसानों ने थाली बजाकर मन की बात का विरोध किया

किसानों ने रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मन की बात कार्यक्रम का विरोध थाली बजाकर किया। भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने बताया कि जैसे पीएम ने कहा था कि कोरोना थाली बजाने से भागेगा, उसी तरह किसान भी थाली बजा रहें हैं ताकि कृषि कानूनों को भगाया जाए। उन्होंने कहा कि यह सरकार के लिए संकेत है कि सरकार जल्द सुधर जाए। 29 दिसंबर को हम सरकार के साथ मुलाकात करेंगे। नया साल सबके लिए शुभ हो और अगर मोदी जी भी कानून वापस ले लें, तो हम किसान भाइयों के लिए भी नया साल शुभ हो जाएगा। 


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