योगी का विकासवाद

उत्तर प्रदेश की बागडोर भाजपा नीत योगी आदित्य नाथ सरकार के हाथ में आने के पहले उसका शुमार देश के बीमारू राज्य के रूप में होता था. राज्य लचर कानून व्यवस्था, जातिवादी-धर्मवादी राजनीति का पर्यायवाची शब्द बन गया था. मजबूरी में प्रान्त के नागरिकों को रोजी-रोटी के लिए दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता था. अपमानजनक स्थितियों का सामना करने के बावजूद भी शांति से उसका जहर पीकर अपने काम में लगे रहना, उसकी नियति बन गयी थी. अक्सर यह सुनने को मिल जाता था कि अपनी सरकार से कहो कि वह वहां क्यों नहीं विकास करती. कई दशकों की सड़ांध एकाएक खत्म नहीं हो सकती, लेकिन जिस तरह का काम योगी राज में हो रहे है उससे अब उत्तरप्रदेश को देखने का नजरिया बदल रहा है. एक जमाने में जिस उत्तर प्रदेश का पिछड़ा होने के नाते उपहास होता था, आज लोग इस बात से चिंतित और भयभीत हैं कि योगी राज के विकास की आंधी में दूसरे राज्यों के उद्योग-धंधे उत्तर प्रदेश में न चले जाएँ. आज कानून व्यवस्था के फ्रंट पर जिस तरह एक जमाने में राज्य में अपनी अजेयता का डंका बजाने वाले और यह दिखाने वाले माफिया, कि वे कुछ भी कर सकते है जिस तरह से भीगी बिल्ली बन गये है, उनके अवैध निर्माणों पर बुलडोजर दौड़ रहे है, उनकी मुश्कें बाधी जा रही है, जिस तरह से देश के बड़े-बड़े उद्यमी वहां निवेश करने के लिए आगे आये है, और गत तीन सालों में लगभग तीन लाख करोड़ का निवेश हुआ है. लगता ही नहीं कि यह वही उत्तर प्रदेश है, जहां व्यापारी निवेश करने से डरते थे. बिजली और अच्छी सड़कें जो एक जमाने में लक्जरी थी आज सहसा सुलभ हो गए हैं. अब लोग बिल अदा करना भी सीख गये है. काशी, मथुरा, प्रयागराज आज से नहीं है लेकिन वहां आज जो कायाकल्प दिख रहा है, आयोजनों की विराटता और भव्यता के जो दर्शन आज वहां हो रहे है, वैसा मोदी-योगी युग के पहले कभी भी नहीं दिखा. इससे जहां एक ओर देश की सभ्यता और संस्कृति की गूूंज पूरी दुनिया में हो रही है वहीं, दूसरी ओर देश और राज्य के राजस्व में भी इजाफा भी हो रहा है. लोगों को रोजगार मिल रहा है. राज्य के इतिहास में पहली बार राज्य के लोगों को लग रहा है कि अब राज्य विकास पथ पर सही दिशा में चल रहा है. जैसा कि योगी ने विगत दिनों मुंबई में कहा था कि देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में उत्तरप्रदेश अपनी भूमिका निभाने को पूरी तरह तैयार है.

एक व्यक्ति की इच्छाशक्ति किस तरह किसी राज्य का कायाकल्प कर सकती है, इसके मुख्यमंत्री योगी सबसे सशक्त उदाहरण है. लगभग तीन दशक से ज्यादा समय से जातिवादी दलों की राजनीति का शिकार राज्य माफिया और गुंडाराज से ही उत्पीडित रहा. सपा-बसपा और कांग्रेस की अल्पसंख्यक परस्ती और परिवारवाद को बढ़ावे की मिली खुली लूट ने राज्य को बदहाली की कगार पर ला दिया था. भला हुआ तो सिर्फ इनके चाटुकारों और इनके परिवार का. इन सबके चलते राजनीति और नौकरशाही में जो अच्छे लोग थे, वह भी चुप्पी साधने को मजबूर थे. मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति ने इस नकारात्मक प्रवाह को सिर्फ तोड़ा ही नहीं बल्कि पूरी तरह से झकझोर दिया है. आज वहां विकास की बात हो रही है और नकारात्मक अवलंब लेकर राजनीतिक रोटी सेंकने वालों को पता ही नहीं चल रहा है कि क्या करें कि उनका अस्तित्व बचा रहे. कारण आज सिर्फ एक ही वाद उत्तर प्रदेश में दिख रहा है जो कि विकासवाद है. यदि ऐसे ही चलता रहा तो उत्तरप्रदेश में और किसी वाद को जगह नहीं रहेगी. यह योगी की उस दृष्टि का कमाल है जिसके दायरे में राज्य का हर क्षेत्र व विभाग आता है. अब अवाम को भी चाहिए कि इस विकास यात्रा में वह पूरी सिद्दत से भागीदारी करें और उत्तम प्रदेश की इस यात्रा को सफल बनाये.

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