आयुर्वेद के अनुसार करें त्वचा की देखभाल

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आयुर्वेद का जन्म भले ही भारत में हुआ हो, लेकिन इसने पूरे विश्व में अपने नैसर्गिक, सर्वागीण उपचार से अपनी पहचान क़ायम कर ली है. आयुर्वेद के अनुसार त्वचा सेहत की खिड़की है और इस तथ्य से मुख्यधारा का विज्ञान भी सहमत है. भले ही अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सांवली रंगत को पसंद किया जाता हो, लेकिन भारतीय त्वचा की अपनी समस्याएं हैं, जैसे-पिग्मेंटेशन, लाल चकत्ते (स्ट्रॉबेरी स्किन) और हाइपरकेरैटॉसिस. किसी भी त्वचा का उपचार करने की दिशा में सबसे पहला क़दम होगा अपनी त्वचा को जानना. आयुर्वेद लोगों को तीन दोषों में विभाजित करता है: वात, पित्त और कफ़. यह संभव है कि आप में दो दोषों का संयोजन हो. इन कुछ आसान से सवालों का जवाब देकर अपने दोष का प्रकार जानकर अपनी त्वचा की ज़रूरतों को समझ सकती हैं:

आपकी त्वचा का प्रकार है...

a. शुष्क, b. संवेदनशील, c. ऑयली

आपके बाल कैसे हैं?

a. पतले और रूखे, b. सामान्य, c. मोटे

इनमें से आपके व्यक्तित्व की विशेषता क्या है?

a. कलात्मकता, b. नेतृत्व क्षमता, c. दयालुता

आपके शरीर का प्रकार क्या है?

a. पतला, b. सामान्य, c. मोटा

आप आमतौर पर कितने घंटे की नींद लेती हैं?

a. पांच से छह घंटे, b. आठ घंटे, c. आठ घंटे से ज़्यादा

आपके चेहरे का आकार कैसा है?

a. दुबला-पतला, b. अंडाकार/ इकहरा, c. गोल और भरा हुआ

आपको कितना पसीना आता है?

a. मध्यम, b. बहुत अधिक और दुर्गंधयुक्त

c. हल्का

ज़्यादातर a: आप वात दोष के अंतर्गत आती हैं. डॉ चंदन एमसी, सीनियर आयुर्वेद फ़िजिशन, आनंदा-इन द हिमालयास के अनुसार,‘‘गर्म तेल से मसाज करना त्वचा को चिकना बनाए रखने में मदद कर सकता है. दिमाग़ और शरीर दोनों की ऊर्जा बनाए रखने के लिए ख़ूब आराम करें.’’

ज़्यादातर b: आप पित्त दोष में आती हैं. डॉ चंदन कठोर और सिन्थेटिक कॉस्मेटिक्स से दूर रहने की सलाह देते हैं, क्योंकि आपके दोष के अनुसार आपको मुहांसे होने की संभावना ज़्यादा रहती है. धूप में निकलने से पहले पूरी तैयारी कर लें.

ज़्यादातर c: आपका प्रकार कफ़ दोष है. अपनी मोटाई और तैलीय गुणों के चलते इस प्रकार के अंतर्गत आनेवाली त्वचा में टॉक्सिन्स इकट्ठा होने की ज़्यादा संभावना रहती है. दिन में दो बार अपनी त्वचा को क्लेज़ करें और सप्ताह में एक बार मड पैक लगाएं.

यह संभव है कि जन्म के वक्त आपकी त्वचा का प्रकार कुछ और हो और समय के साथ मौसम, डायट और जीवनशैली से जुड़ी आदतों या प्रदूषण-जैसे, बाहरी तत्वों के प्रभाव से आगे चलकर आपकी त्वचा का प्रकार बदल जाए.


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