भारत का ड्रैगन को जवाब

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नई दिल्ली

चीन की ओर से सीमा गतिरोध के लिए भारत पर आरोप लगाए जाने के बाद विदेश मंत्रालय ने पलटवार किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि पिछले छह महीने में हमने जो स्थिति देखी है, वह चीनी पक्ष की तरफ से की गई कार्रवाई का परिणाम है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि एलएसी पर चीन की कार्रवाई सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने के लिए किए गए द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन है।

विदेश मंत्रालय ने कहा कि मुख्य मुद्दा यह है कि दोनों पक्ष विभिन्न द्विपक्षीय समझौतों और प्रोटोकॉल का पूरी तरह पालन करें। भारत ने बॉर्डर पर सैन्य गतिरोध को लेकर कहा कि चीन ने पूर्वी लद्दाख में एलएसी पर स्थिति को एक-तरफा ढंग से बदलने की कोशिश की। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हमने चीन के उस बयान का संज्ञान लिया है, जिसमें उसने कहा है कि वह द्विपक्षीय समझौतों का कड़ाई से पालन करता है और सीमा मुद्दे का समाधान वार्ता के जरिए निकालने को प्रतिबद्ध है। गुरुवार को चीन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि बीजिंग और नई दिल्ली के बीच अच्छे संबंध बनाए रखने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत है तथा उनका देश सीमा गतिरोध दूर करने के लिए कटिबद्ध है, लेकिन वह अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता की रक्षा करने के लिए भी प्रतिबद्ध है। चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता हुआ चुनयिंग ने (भारतीय) विदेश मंत्री एस जयशंकर की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया देते हुए यह बात कही थी। हुआ ने चीनी विदेश मंत्रालय की नियमित प्रेस ब्रीफिंग में कहा था, चीन और भारत पड़ोसी हैं तथा दुनिया के दो सबसे बड़े उभरते बाजार हैं, ऐसे में अच्छे संबंध बनाए रखने से दोनों देशों एवं उनके लोगों के बुनियादी हितों की पूर्ति होती है, लेकिन इसके लिए दोनों पक्षों के बीच रास्ते में मिलने के लिए साझा प्रयासों की जरूरत है। उन्होंने कहा, भारत-चीन सीमा पर जो भी कुछ गलत और सही हुआ, वह बहुत स्पष्ट है और जिम्मेदारी पूरी तरह भारत के कंधों पर है। चीन वार्ता के माध्यम से सीमा मुद्दे का समाधान तथा सीमावर्ती क्षेत्र में शांति बरकरार रखने के लिए कटिबद्ध है।


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