प्राइमरी शिक्षकों के अवकाश देने के नियम में बदलाव

गोरखपुर 

परिषदीय विद्यालयों के शिक्षकों का चार दिन तक का अवकाश प्रधानाध्यापक स्वीकृत करेंगे। इससे अधिक होने पर बीईओ करेंगे। यदि किसी कारणवश अवकाश अस्वीकृत करते हैं तो संबंधित अधिकारी को इसके लिए स्पष्ट टिप्पणी देते हुए कारण बताना होगा। समय अवधि निर्धारित होने के बावजूद कई जनपदों में इसका उल्लंघन हो रहा है। मानव संपदा पोर्टल की समीक्षा में बेसिक शिक्षा विभाग में अवकाश के नाम पर देरी व शोषण के मामले सामने आने पर महानिदेशक स्कूल शिक्षा ने बेसिक शिक्षाधिकारियों व खंड शिक्षाधिकारियों को चेतावनी देते हुए सुधार के निर्देश दिए हैं। शासन स्तर पर गत दिनों परिषदीय स्कूलों में आकस्मिक अवकाश, चिकित्सा अवकाश और बाल्य देखभाल अवकाश के आवेदनों की समीक्षा की गई। पाया गया कि प्रतिमाह खंड शिक्षाधिकारी स्तर पर औसतन 675 आवेदन मिल रहे हैं। चार दिन से कम अवकाश के आवेदन भी उन्हीं को भेजे जा रहे हैं, जबकि शासनादेश में चार दिन से कम का अवकाश प्रधानाध्यापक को और उससे अधिक होने पर खंड शिक्षाधिकारी को स्वीकृत करना है। 880 विकास खंडों में से 119 विकास खंड ऐसे हैं, जिनमें नवंबर में सौ से कम आवेदन आकस्मिक अवकाश के आए हैं। समीक्षा में इस आधार पर माना गया कि 119 विकास खं डेंमेंमानव सं पदा पोर्टल से अवकाश के लिए आवेदन के निर्देश का पालन नहीं किया जा रहा है। यहीं नहीं एक दिन में आवेदन निस्तारण के आदेश के बावजूद कई ब्लाकों में सौ-सौ दिन लगाए जा रहे हैं। इसी प्रकार चिकित्सा अवकाश के आवेदन बीईओ और बीएसए के स्तर से दो-दो दिन में निस्तारित किए जाने चाहिए। 


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