पाक का व्यवहार तो एक डरे हुए राष्ट्र जैसा नहीं लगता

ढोंग, नौटंकी और रंग बदलने में माहिर आतंक का मक्का मोदी युग में दो-दो सर्जकिल स्ट्राइक और न जाने कितने करारे जबाब झेलने के बाद भी अपनी कुत्सित हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. उसके द्वारा बनिा किसी कारण सीजफायर उल्लंघन का कीर्तिमान बनाया जा रहा है. शायद ही कोई दनि ऐसा गुजरता है जब उसके द्वारा हमारी सीमा में घुसपैठ के प्रयास न किये जाते हों. रोज घाटी में पाक निर्मित हथियार बरामद हो रहे है और उनके द्वारा संचालित हैवान पकड़े जा रहे है. वह हमारे प्रति द्वेष प्रदर्शित करने का कोई मौका नहीं छोड़ता. यही नहीं समाप्त हो चुके खालिस्तानी आंदोलन को जनि्दा करने का प्रयास सतत जारी है. वह चीन की बीन पर हमारे खिलाफ कैसे नागनि नृत्य करता है उसका और उसके आतंकी करोबार का नजारा रोज हम और दुनिया देख रही है. ऐसा कुत्सित काम किसी जिम्मेदार देश का नहीं हो सकता, यही नहीं जिस बेहयाई से पुलवामा जैसी घृणित और कायराना करतूत की कबूली पाकिस्तान के एक मंत्री ने सार्वजनकि रूप से की उसे भी दुनिया जान चुकी है. ऐसे देश का विदेश मंत्री दूसरे देश में जाकर यह आशंका व्यक्त करे कि भारत उस पर फिर स्ट्राइक करने वाला है तो कौन यकीन करेगा? रोज गलत काम करोगे, सीमा पर आतंकियों को भेजने और हथियार भेजने के लिए सुरंग खोदोगे और उसके बाद दुनिया के सामने आप डरे हुए हो, का अभनिय करोगे तो आप पर कौन विश्वास करेगा. भारत तो पहले ही कह चुका है कि हमारे खिलाफ छद्म युद्ध बंद करो, आतंकियों को भेजना बंद करो और हमारा काश्मीर का वह िहस्सा जो अापने जबरदस्ती कब्जाया है छोड़ दो, शांति से रहो और शांति से रहने दो. आप वह नहीं सुनते आप जबरदस्ती काबजि जमीन पर अपने आका चीन को अवैध निर्माण की अनुमति देते हो. इसके बाद भी यह रोना धोना क्यों? जिस किसी भी देश के साथ दूसरा देश उतना गलत करेगा जितना ऊपर बताया गया है तो वह चुपचाप बैठ कर तमशा तो नहीं देखेगा. यह बात हमारे प्रधानमंत्री एक बार नहीं अनेकों बार स्पष्ट कर चुके है, कि यदि पाकिस्तान ने कोई उल्टी-सीधी हिमाकत की तो उसका कड़ा विरोध होगा. सेना को भी यदि हमारा एक आदमी या जवान मारा जाता है तो चार मारने की इजाजत है. तो पाकी विदेश मंत्री को घडियाली आंसू बहाना बंद कर कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे उसकी साख दुनिया में एक जिम्मेदार देश के रूप में बने. आतंक का निर्यात करके और प्रतिदनि षड्यंत्र रच कर यदि उसे लगता है की भारत सब कुछ झेलता रहेगा तो वह दनि 2014 से ही समाप्त हो चुका है, इसका अंदाजा उसे भी आ चुका है. चीन जैसे भूमिपिपासु और तुर्की जैसे महात्वाकंाक्षी देश को छोड़ दें तो जनिका उसके साथ खड़े होने में कुत्सित स्वार्थ हैं. तो दूसरा कोई मुस्लिम देश भी उनका हामी छोड़िये, मददगार बनने को तैयार नहीं है. तो जो कई दशकों से उसकी कुत्सित कारस्तानियों का भुक्त-भोगी है और नादान पड़ोसी है यह मानकर उसे झेला है, अब इससे ज्यादा उसे झेलने को तैयार नहीं है. इसका भान उसे है लेकनि जब उसकी नियति नहीं बदलती दिखेगी तो यह भान और दुनिया भर में सर्जकिल स्ट्राइक होने की गुहार सिर्फ और सिर्फ नौटंकी या दिखावा ही मानी जाएगी.इसलिए अभी भी समय है पाक चेत जाय और अपनी रीति-नीति जो उसने अभी तक हमारे साथ अपनाई है और जिसक स्थाई भाव हमारे प्रति द्वैष, षडयंत्र और आतंक का उपयोग है, से काम नहीं चलेगा. उसे इससे तौबा करना होगा और हमारे उस इलाके जिस पर उसका अवैध कब्जा है छोड़ना होगा, नहीं तो आज वह जिस डर का दिखावा कर रहा है, यदि वह उक्त बातों को नहीं माना और ऐसे ही करता रहा तो वह कभी भी सच बन सकता है.


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