अपने बच्चों के दोस्तों पर नजर रखें


हातो सच है कि कुछ रिश्ते तो हमे जन्म से मिलते है। आंख खोलते ही बुआ, मासी, मामी, नानी-नाना, दादी-दादा, बहन-भाई, माता-पिता आदि रिश्ते उसी वक्त से शुरू हो जाते हैपर दोस्ती थोड़ी समझ आने पर होती है। दोस्ती करना तो आसान है पर निभाना बहुत मुश्किल। बच्चों मे दोस्ती होती भी जल्दी है और बिगड़ती भी जल्दी है क्योंकि यह उनका भोलापन होता है कि एक पल मे झगड़ा, अगले पल फिर दोस्ती। दोस्ती हर उम्र की जरूरत है, चाहे आप छोटे है, बड़े या बुजुर्ग। दोस्ती एक खूबसूरत रिश्ता है, अहसास है। जिसके पास अच्छा दोस्त हो, उसे दुनिया मेबहुत कुछ मिल जाता है क्योंकि एक अच्छा दोस्त ही दोस्त की भावनाओं, आदतों, मूड और समस्याओं को समझ सकता है पर बचपन मे दोस्ती करते समय दिमाग इतना नहीं होता।
 

वैसे माता-पिता भी अधिक परवाह नहीं करते कि बच्चे क्या खेलते हैं, किन दोस्तों के साथ कहां जाते हैं, कैसी बातें करते हैं पर माता-पिता को बच्चों के दोस्तों पर नजर जरूर रखनी चाहिए ताकि समय रहते बच्चे को गलत दोस्तों से थोड़ा दूर किया जा सके। कभी-कभी बच्चे जल्दी मिक्सअप नहीं होते, ग्रुप में खेलने से कतराते हैं या जल्दी झगड़ा कर अलग हो जाते हैं। ऐसे में पेरेंटस को दोस्त बनाने में उनकी थोड़ी मदद करनी चाहिए और बाकी बच्चों से अकेले में अपने बच्चे के बारे में बात कर उसकी कमी जानकर बच्चे को समझाएं और दोस्ती की महत्ता बताएं और उसको खेलने-कूदने के गुण भी समझाएं।

पेरेंटस को चाहिए कि बच्चे और उनके दोस्तों के बीच रिश्ते अच्छे बनें। उन्हें घर पर कभी-कभी पार्टी या बर्थडे पार्टी का आयोजन कर दोस्तों को बुलाने का अवसर दें जिससे बच्चे आपस में अच्छी तरह स्वतंत्र वातावरण का आनंद ले सकें और रिश्ते को मजबूत बना सकें पर थोड़ी नजर अवश्य रखें। यदि आप नए शहर में जा रहे हैं तो यह स्पष्ट है कि नई जगह पर दोस्त बनाना थोड़ा मुश्किल होता है। ऐसे में अध्यापक की मदद लेकर अपने आस-पास रहने वाले बच्चों के पेरेंटस से मिलें और बच्चों को साथ ले जाकर उनमें दोस्ती करवाएं। फिर परिवार सहित उनको अपने यहां निमन्त्रित कर दोस्ती के खूबसूरत रिश्ते को आगे बढ़ाएं।

कभी-कभी अपने बच्चों को दूसरे बच्चों के घर ड्राप करें और एक सीमित समय देकर उन्हें वापिस पिकअप करें ताकि दोस्ती और घनिष्ठ हो सके और माता-पिता को भी यह तसल्ली रहे कि बच्चा ठीक परिवार में है।

नई जगह बच्चा दोस्त बनाने में जल्दी फ्री नहीं हो पा रहा तो माता-पिता को चाहिए कि पुराने दोस्तों से ई-मेल, पत्र, फोन द्वारा कुछ समय तक संपर्क बनवाए रखें ताकि बच्चा अकेलापन महसूस न करे।


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